Breaking
19 Jan 2026, Mon

वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पुनर्निमाण के दौरान इस मंदिर को नहीं तोडा गया

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण कार्य चल रहा है। इस बीच सोशल मीडिया में भगवान शिव के एक मंदिर की तस्वीर वायरल है। लोग दावा कर रहे हैं कि मणिकर्णिका घाट पर इस मंदिर को तोड़ दिया गया। हालाँकि पड़ताल में पता चलता है कि यह तस्वीर करीबन 5 साल पुरानी है, साथ ही यह मंदिर भी सही सलामत है।

कविश अजीज ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘ये औरंगजेब और बाबर का बनारस नहीं….. बल्कि मोदी की कांस्टीट्यूएंसी है जहां मणिकर्णिका घाट तोड़ा जा रहा है’

ऋतू ने लिखा, ‘काशी से दिल दहला देने वाली तस्वीर!  यह टूटा हुआ मंदिर खामोशी से पड़ा है, इसका नंदी मलबे के बीच शिव को ढूंढ रहा है।  ये पत्थर, जो कभी भक्ति में डूबे थे, अब मशीनों के नीचे कुचले पड़े हैं। उन्होंने हमारे विश्वास को मलबे में बदल दिया।  और सबसे चौंकाने वाली सच्चाई!! महमूद गजनवी ने इसे नहीं तोड़ा था। बाबर ने इसे नहीं तोड़ा था। औरंगजेब इसे नहीं तोड़ पाया था। इसे उस आदमी के राज में तोड़ा गया जिसे “56 इंच हिंदू हृदय सम्राट” कहा जाता है।  इस बात को समझो।  हिंदुओं के साथ अब तक का सबसे बड़ा धोखा।’

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने लिखा, ‘ये महमूद गज़नवी का नही नरेंद्र मोदी का राज है। जहाँ हमारे “पौराणिक मंदिरों” को तोड़ा जा रहा है। देखिए काशी के मणिकर्णिका घाट पर, विनाश का ये दृश्य। @AAPUttarPradesh 20 जनवरी को यू पी के सभी जिलों में प्राचीन मंदिरों को तोड़े जाने के ख़िलाफ़ आंदोलन होगा। AAP ने काशी के मंदिरों को बचाने के लिये पहले भी आंदोलन किया था हम पर मुक़दमा हुआ था।’

संदीप देव ने लिखा, ‘आज की काशी को देखकर लगता ही नहीं कि औरंगजेब का दौर समाप्त हो गया!’

कृष्ण कांत ने लिखा, ‘हजार-पांच सौ साल पुराने मंदिर, स्नान घाट और मॉल में अगर आपको फर्क नहीं पता है, एक प्राचीन विरासत और उसे तोड़ ताड़ कर पत्थर सीमेंट के नवनिर्माण में अंतर नहीं पता है तो आपका कुछ नहीं हो सकता। ऐसे पागलों से बहस नहीं की जा सकती। काम करने हैं छंटे मूर्खों वाले और बनना है जवाहर लाल नेहरू, तुमसे नहीं हो पाएगा। तुम्हारे लच्छन ठीक नहीं हैं।’

अमित ने लिखा, ‘मेरा सवाल सिर्फ इतना है कि क्या काशी के सैंकड़ों साल पुराने मंदिरों को विकास के नाम पर तोड़ देना उचित है…? अगर यूपी में सरकार बीजेपी की न होकर सपा और कांग्रेस की या फिर बीएसपी की होती तो बीजेपी समर्थकों का स्टैंड क्या तब भी चुप्पी भरा रहता…? लोगों को पार्टी देखकर विरोध नहीं करना चाहिए बल्कि सही और गलत के आधार पर विरोध करना चाहिए।’

इसके अलावा चिन्मयी श्रीपदा, दशरथ, गौरव यादव, डॉ. रंजन, प्रगनय गुप्ता, पप्पू यादव, प्रेम भारद्वाज, महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस, लुटियंस मीडिया, प्रभाकर नारायणराव पेशवा, संजीव अवस्थी, जसविंदर कौर, संदीप देव, This Podcast Guy और Saint Soldier Wisdom ने भी इस तस्वीर को पोस्ट किया है।

क्या है हकीकत? पड़ताल में हमे यह तस्वीर एक्स यूजर शिवम मिश्रा के एक पोस्ट में मिली। शिवम मिश्रा ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण कार्य के दौरान मंदिर तोड़ने की घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने 24 अक्टूबर 2021 को इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा था, ‘काशी विश्वनाथ कॉम्प्लेक्स में ‘कैलाश मंदिर’ की गंदी कहानी, जिसे कुछ ही दिनों में गिराया जा सकता है। इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट ले लें। यह मंदिर सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया था। महंतों का कहना था कि सरकार इसे गिराने पर तुली हुई है।’

आगे की पड़ताल में हमे इस मंदिर की कई तस्वीर ‘Cultural heritage of varanasi‘ की वेबसाइट पर मिली। इस मंदिर का नाम ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर’ है, इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का मंदिर बताया गया है। रिपोर्ट में लिखा है कि श्री चिंतामणि महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। वाराणसी में स्थित शिवालयों के नामों के अंत में अक्सर ‘ -ईश्वर ‘ प्रत्यय लगा होता है। लेकिन यह मंदिर इस परंपरा से अलग है, जिसका नाम शिव के बड़े पुत्र गणेश के नाम पर रखा गया है, जिन्हें चिंतामणि के नाम से भी जाना जाता है।

हमने वायरल मंदिर की तस्वीर और ‘Cultural heritage of varanasi’ की वेबसाइट पर मौजूद ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर ‘ में कई समानताएं देखी। दोनों तस्वीरों की वास्तुकला, नक्काशी, नंदी, स्तम्भ, मूर्तियाँ एक-दूसरे से मेल खाती हैं।

इसके बाद हमे एक ब्रिटिश आर्कियोलॉजिस्ट, फोटोग्राफर Kevin Standage का एक ब्लॉग मिला। केविन ने फरवरी 2020 में वाराणसी यात्रा के दौरान काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण को लेकर एक आर्टिकल लिखा था। उन्होंने लिखा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण कार्य के दौरान मणिकर्णिका घाट से थोड़ी दूरी पर ‘श्री कुम्भा महादेव मंदिर’ और ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर’ दो मंदिर खोजे गए। गलियारा बनाने के लिए ढाँचों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया से पता चला है कि मंदिरों का उपयोग दुकानों, शयनकक्षों, रसोई, भंडारगृहों और कुछ मामलों में शौचालयों के रूप में भी किया जा रहा था।

इसके बाद हमे वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र से विधायक नीलकंठ तिवारी की फेसबुक प्रोफाइल पर ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर’ से रिकॉर्ड एक वीडियो भी मिला। इस वीडियो में वायरल तस्वीर वाला मंदिर देखा जा सकता है। नीलकंठ तिवारी ने इस वीडियो में बताया है कि वायरल तस्वीर वाले मंदिर को नहीं तोडा गया।

इसके बाद हमने काशी विश्वनाथ मंदिर पहुँचकर वायरल तस्वीर वाले ‘श्री चिंतामणि महादेव मंदिर’ के सम्बन्ध में जांच पड़ताल की। यह मंदिर आज भी अपनी जगह पर बना हुआ है।

इस मंदिर के नजदीक मणिकर्णिका घाट की ओर जाने वाली गली में नीरज पांडे की चाय की दुकान है। हमने उन्हें जब वायरल तस्वीर को दिखाया तो उन्होंने बताया कि यह तस्वीर चिंतामणि महादेव मंदिर की है। अभी तो आप सामने से देख सकते हैं कि मंदिर में कोई तोड़फोड़ नहीं हुई है। पहले मंदिर के आसपास घर हुआ करते थे। लेकिन कॉरिडोर बनाने के दौरान सब तोड़ दिया गया। यह तस्वीर भी उसी समय की है।

इस सम्बन्ध में हमने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा से भी सम्पर्क किया। उन्होंने बताया कि ज्ञानवापी परिसर में इस वक्त किसी मंदिर में तोड़फोड़ नहीं चल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *