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3 Feb 2026, Tue

पीएम मोदी ने जातिवाद को लेकर सवर्णों से बदला लेने की बात नही कही, वायरल वीडियो एडिटेड है

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगी दी। अब नए आदेश तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। इस बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में पीएम मोदी कह रहे हैं कि आप कल्पना कर सकते हो कि एक महापुरुष जिसको इतना जुल्म सहना पड़ा हो। जिसक बचपन अन्याय उपेक्षा और उत्पीड़न से बीता हो। जिसने अपनी मां को अपना में अपमानित होते देखा। मुझे बताइए ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं? इस वीडियो को इस संदर्भ में शेयर किया जा रहा है कि पीएम जातीय भेदभाव को लेकर सवर्णों से बदले की बात कह रहे हैं।

ममता त्रिपाठी ने लिखा, ‘रूपरेखा तो पहले से ही तैयार हो गई थी…UCC कहते रहे और ले आए UGC… #UGCRegulations को लेकर मोदी सरकार GC वालों की नाराज़गी को बैरोमीटर पर नाप रही है… सोशल मीडिया पर नाराज़गी से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता जबतक नाराज़गी ज़मीन पर ना दिखे…चुनावी नफा नुक़सान के अलावा कुछ नहीं सोचते’

ब्रजेश मिश्रा ने लिखा, ‘तुम मुझे पानी भरने नहीं देते थे, तुम मुझे मंदिर नही जाने देते थे… कितनी चालाकी से ये मोदी उस सवर्ण को अत्याचारी बता रहा है, जिसे सवर्ण समाज ने सर माथे बैठाया… सोचों सवर्ण समाज को सोचना चाहिए कि ये कैसे हिंदुत्व को मज़बूत कर रहा है?’

क्या है हकीकत? पड़ताल में हमने इस वीडियो के अलग अलग स्क्रीनशॉट को गूगल रिवर्स सर्च किया तो पीएम मोदी के वायरल क्लिप का पूरा वीडियो हमें 21 मार्च 2016 को भाजपा के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट मिला। यह वीडियो डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक की आधारशिला रखने के अवसर पर पीएम मोदी के संबोधन का है।

करीबन 47 मिनट के वीडियो में ठीक 36:37 मिनट पर पीएम मोदी ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हो कि एक महापुरुष जिसको इतना जुल्म सहना पड़ा हो। जिसक बचपन अन्याय, उपेक्षा और उत्पीड़न से बीता हो। जिसने अपनी मां को अपना में अपमानित होते देखा। मुझे बताइए ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा?

पीएम ने आगे कहा, तुम मुझे पानी नहीं भरने देते थे। तुम मुझे मंदिर नहीं जाने देते थे। तुम मेरे बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने से मना करते थे। मनुष्य का जो लेवल है ना वहां यह बहुत स्वाभाविक है। लेकिन जो मानव से कुछ ऊपर है वह बाबा साहब अंबेडकर थे कि जब उनके हाथ में कलम थी। कोई भी निर्णय करने की ताकत थी। लेकिन आप पूरा संविधान देख लीजिए, पूरी संविधान सभा की डिबेट देख लीजिए, बाबा साहेब अंबेडकर की बातों में वाणी में शब्द में कहीं कटुता नजर नहीं आती है। कहीं बदले का भाव नजर नहीं आता है। उनका भाव यही रहा और वह भाव क्या था। मैं अपने शब्दों में कह सकता हूं कि कभी कभार खाना खाते समय दांतों के बीच हमारी जीभ कट जाती है लेकिन हम दांत तोड़ नहीं देते हैं। क्यों? क्योंकि हमें पता है दांत भी मेरे हैं, जीभ भी मेरी है। बाबा साहब आंबेडकर के लिए सवर्ण भी उनके थे और हमारे दलित, पीड़ित, शोषित दोनों ही उनके लिए बराबर थे। इसलिए बदले का नामो निशान नहीं था। कटुता का नामो निशान नहीं था।

दावापीएम मोदी अपने एक भाषण में जातिगत भेदभाव को लेकर बदले की बात कर रहे हैं।
हकीकतपीएम मोदी का वीडियो एडिटेड है। मूल वीडियो में वह अम्बेडकर में जातीय भेदभाव के खिलाफ बदले की भावना न होने की बात कहते हुए उन्हें महापुरुष कह रहे थे।

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