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30 Aug 2025, Sat

पीएम मोदी की डिग्री पर हस्ताक्षर करने वाले कुलपति के लेकर वायरल दावा भ्रामक है

बीते दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि 1983 में पीएम मोदी की डिग्री पर दस्तखत करने वाले वाइस चांसलर केएस शास्त्री का 1981 में ही निधन हो गया था। जबकि कुछ लोग लिख रहे हैं कि केएस शास्त्री का कार्यकाल 1981 तक ही था तो उन्होंने 1983 में पीएम मोदी की डिग्री पर हस्ताक्षर कैसे किए?

श्रीराम ने लिखा, ‘प्रोफेसर एस शास्त्री, दिल्ली विश्वविद्यालय के वीसी 1981 में सेवानिवृत्त हुए, मोदी की 1983 की डिग्री पर उनके हस्ताक्षर हैं।’

आबिद शैख ने लिखा, ‘मोदी जी की #डिग्री 1983 की है जिसपर #हस्ताक्षर वाइस चांसलर के एस शास्त्री के हैं जो 1981 में सेवेनिवृत हो गए थे। डिग्री पर जो font इस्तेमाल किया गया है वो उस वक्त था ही नहीं लेकिन मोदी है तो मुमकिन है।’

सपा नेता जितेन्द्र वर्मा ने लिखा, ‘प्रधानमंत्री की डिग्री पर हस्ताक्षर करनेवाले वाईस चांसलर K S शास्त्री का निधन 1981 में हो चुका था…तो उसके बाद डिग्री कैसे प्रिंट हुआ ?’

इसके अलावा कांग्रेस नेता अर्जुन वोहरा, आआप नेता नूर सिद्दकी ने भी यही दावा किया है।

क्या है हकीकत? पड़ताल में हमने देखा कि वायरल पोस्ट में दो तस्वीरों का एक कोलाज है, जिसमें से एक में पीएम मोदी के नाम वाली डिग्री का सर्टिफिकेट है। डिग्री ‘Entire Political Science’ विषय की है और इसमें जारी करने की तारीख 30 मार्च 1983 लिखी है। डिग्री पर केएस शास्त्री नाम के वाइस चांसलर (कुलपति) के हस्ताक्षर हैं। कोलाज की दूसरी फोटो में एक व्यक्ति की ब्लैक एंड वाइट फोटो है और नीचे लिखा है, ‘Prof. K.S. Shastri”, Vice Chancellor (22-08-1980 to 13-07-1981)।

अनिल यादव ने वाइस चांसलर डॉ. केएस शास्त्री के 1981 में निधन के दावे में जिस तस्वीर का इस्तेमाल किया है उस पर 12 अगस्त 1980 से 13 जुलाई 1981 तारीख लिखी हुई है। इस तस्वीर के आधार पर यह सम्भव ही नहीं है कि कोई शख्स अपनी जिन्दगी के 11 माह में प्रोफेसर बन जाए। असल में इस तस्वीर को ‘वीर नर्मद साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी’ (VNSGU) की वेबसाइट से लिया गया है। प्रोफेसर केएस शास्त्री 22-08-1980 से 13-07-1981 तक इस यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे। यह उनके जीवन की नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी में कार्यकाल की अवधि है।

VNSGU

यहां बता दें कि गुजरात यूनिवर्सिटी और VNSGU, दोनों अलग-अलग यूनिवर्सिटी हैं। गुजरात यूनिवर्सिटी अहमदाबाद में स्थित है, वहीं VNSGU सूरत में। यहां इतनी बात स्पष्ट हो जाती है कि के.एस. शास्त्री 1980 से 1981 तक VNSGU के वाइस चांसलर रहे हैं, ना कि गुजरात यूनिवर्सिटी के।

इसके बाद हमने गुजरात यूनीवर्सिटी की बेबसाईट को खंगाला। बेबसाईट के मुताबिक प्रोफेसर डॉ. केएस शास्त्री 1981-1987 तक गुजरात यूनीवर्सिटी के वाइस चांसलर थे। गुजरात यूनिवर्सिटी के कुलपतियों की सूची में प्रो. शास्त्री का नाम देखा भी जा सकता है। यहां से पता चलता है कि शास्त्री 1983 में गुजरात यूनिवर्सिटी के कुलपति थे। प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री 1983 की है। उस समय प्रोफेसर के.एस. शास्त्री ही गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे।

Gujrat University

हमने गुजरात यूनीवर्सिटी से सम्पर्क किया तो ‘PA and Sr. Clerk’ दयन दामोदरन ने हमे बताया कि प्रोफेसर डॉ. केएस शास्त्री 1891-1987 तक वाइस चांसलर रहे हैं। बाद में वो 1997-2000 तक प्रो वाइस चांसलर भी रहे। इस वक्त वो अहमदाबाद में ‘सोम ललित कॉलेज’ के चेयरमैन हैं।

गूगल पर सर्च करने पर हमे ‘सोम ललित कॉलेज‘ की बेबसाईट मिली। ‘सोम-ललित एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन(SLERF) की बेबसाईट पर भी डॉ. केएस शास्त्री को चेयरमैन बताया गया है। हमने कॉलेज से सम्पर्क किया तो उन्होंने डॉ. केएस शास्त्री के निधन के दावों का खंडन किया।

SLERF

मोदी का विरोध करने की वजह गिरफ्तार हुए थे केएस शाश्त्री? पड़ताल में हमे टाइम्स ऑफ इंडिया पर नवम्बर, 2003 को प्रकाशित खबर मिली। रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व कुलपति और उनके बेटे पर अवैध ”शुल्क वृद्धि’ का आरोप लगा था। प्रोफेसर शाश्त्री को भ्रष्टाचार, जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि बाद में उन्होंने इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की साजिश बताया था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक करप्शन का यह कथित मामला 14 जुलाई, 1997 और 13 जुलाई, 2000 के बीच की अवधि का है, जब शास्त्री गुजरात यूनीवर्सिटी के के प्रो-वाइस चांसलर थे।

दावाहकीकत
पीएम मोदी की डिग्री फर्जी है, क्योंकि उनकी 1983 की गुजरात यूनिवर्सिटी वाली डिग्री पर जिस वाइस चांसलर के. एस. शास्त्री के हस्ताक्षर हैं, उनका कार्यकाल 1981 में ही खत्म हो गया था।

के. एस. शास्त्री का 1981 में निधन हो गया था।
1983 में गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के.एस.शास्त्री थे। उनके कार्यकाल का जो फोटो वायरल है वह गुजरात की एक दूसरी यूनिवर्सिटी का है, जहां उन्होंने 1980 से 1981 तक वाइस चांसलर के पद पर काम किया था। साथ ही उनका निधन 1981 में नहीं हुआ।

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