क्या अमित शाह ने कहा कि सदन में SIR पर चर्चा नहीं हो सकती? वायरल वीडियो एडिटेड है
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न या एसआईआर की प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर पिछले कई हफ़्तों से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया में अमित शाह का एक वीडियो वायरल है। वायरल वीडियो में शाह कहते हैं, “न बोलने के दो कारण हैं,एक कारण था कि चर्चा गहन पुनरीक्षण के नाम पर वो मांगते थे, SIR के नाम पर वो मांगते थे, मान्यवर मेरा बहुत स्पष्ट मत है कि एसआईआर पर इस सदन पर चर्चा नहीं हो सकती। क्योंकि गहन पुन निरीक्षण की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। भारत का चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त ये सरकार के तहत काम नहीं करते। अगर जब चर्चा होती है चर्चा होती है और कुछ।” वीडियो के साथ दावा है कि अमित शाह सदन में कह चुके हैं कि SIR पर चर्चा नहीं हो सकती।
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क्या है हकीकत?
वामपंथी इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय ने लिखा, ‘अमित शाह सदन में कह चुके हैं कि SIR पर चर्चा नहीं हो सकती। अब राहुल गांधी ने बाहर बहस की चुनौती दी तो कह रहे हैं सदन में आइए। बहस से इतना डर क्यों है?’
अमित शाह सदन में कह चुके हैं कि SIR पर चर्चा नहीं हो सकती। अब राहुल गांधी ने बाहर बहस की चुनौती दी तो कह रहे हैं सदन में आइए। बहस से इतना डर क्यों है? https://t.co/heIf8mT6Iv
— Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک (@Ashok_Kashmir) November 6, 2026
कांग्रेस नेता अनुमा आचार्य ने लिखा, ‘निहायत दोगलापन है ये गृहमंत्री जी! “चित्त भी मेरी, पट भी मेरी, सिक्का मेरे बाप का”!!! ये तो नहीं हो पायेगा. समझे!’
निहायत दोगलापन है ये गृहमंत्री जी! “चित्त भी मेरी, पट भी मेरी, सिक्का मेरे बाप का”!!! ये तो नहीं हो पायेगा. समझे! https://t.co/S8I9TTpYNv
— Wg Cdr Anuma Acharya (Retd) (@AnumaVidisha) November 6, 2026
कांग्रेस नेता प्रतीक सिंह ने लिखा, ‘सरकारी पत्रकार महोदय, ज्यादा पहले नहीं 10 दिसंबर 2025 का अमित शाह का संसद में दिया बयान सुनलो, जिसमे कह रहे है कि SIR के नाम पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती है। कांग्रेस ने पहले भी 2 बार CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव दिया लेकिन उसे स्वीकार्य नहीं किया गया। अब अमित शाह कह रहे है स्पेशल सेशन बुलाकार SIR पर चर्चा कर लेते है, जब आगे कर सकते है तो पहले क्यों मन किया गया?? और सरकार जब चाहे तब स्पेशल सेशन बुला सकती है, विपक्ष की मंजूरी की जरुरत नहीं है।’
सरकारी पत्रकार महोदय, ज्यादा पहले नहीं 10 दिसंबर 2025 का अमित शाह का संसद में दिया बयान सुनलो, जिसमे कह रहे है कि SIR के नाम पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती है। कांग्रेस ने पहले भी 2 बार CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव दिया लेकिन उसे स्वीकार्य नहीं किया गया। अब अमित शाह कह रहे है स्पेशल सेशन बुलाकार SIR पर चर्चा कर लेते है, जब आगे कर सकते है तो पहले क्यों मन किया गया?? और सरकार जब चाहे तब स्पेशल सेशन बुला सकती है, विपक्ष की मंजूरी की जरुरत नहीं है।
— Prateek J Singh 🇮🇳 (@PrateekSinghINC) November 5, 2026
कांग्रेस नेता दिनेश लिलावात ने लिखा, ‘निहायत दोगलापन है ये गृहमंत्री जी ! अमित शाह सदन में कह चुके हैं कि SIR पर चर्चा नहीं हो सकती। अब राहुल गांधी ने बाहर बहस की चुनौती दी तो भाजपाई और अमित शाह कह रहे हैं सदन में आइए। बहस से इतना डर क्यों?’
निहायत दोगलापन है ये गृहमंत्री जी ! अमित शाह सदन में कह चुके हैं कि SIR पर चर्चा नहीं हो सकती। अब राहुल गांधी ने बाहर बहस की चुनौती दी तो भाजपाई और अमित शाह कह रहे हैं सदन में आइए। बहस से इतना डर क्यों? https://t.co/9MzRs5QfYU
— Dinesh Lilawat INC (@DineshLilawatIN) November 6, 2026
इसके अलावा ऋतू चौधरी, गरिमा मेहरा, The Rebel, दबंग योगी, हेमंत मिश्रा, फिरोज अहमद, अतुल पाटिल, मोहित चौहान, दिलीप चौधरी, Lutyens Media, संदीप मानुधने, आनन्द दासा, United with INC, ने भी यही दावा किया।
क्या है हकीकत?
पड़ताल में हमे अमित शाह का यह वीडियो उनके यूट्यूब चैनल पर मिला। 10 दिसम्बर 2025 के इस वीडियो में अमित शाह ने कहा, “माननीय अध्यक्ष जी इस विषय पर चर्चा के लिए सत्र की शुरुआत में दो दिन गतिरोध भी हुआ। इससे एक प्रकार की गैरसमझ गलत धारणा जनता के बीच में पड़ी कि हम लोग ये चर्चा नहीं चाहते। माननीय अध्यक्ष जी मैं स्पष्ट करना चाहता हूं संसद ये देश का चर्चा का सबसे बड़ा पंचायत है। और हम भाजपा वाले, एनडीए वाले चर्चा से कभी नहीं भागते। कोई भी मुद्दा हो संसद के नियमों के अनुसार चर्चा के लिए हम तैयार रहते हैं। हमने दो दिन तक विपक्ष के चर्चा करी कि इसको बाद में किया जाए। दो सत्र बाद में किया जाए। मगर नहीं माने। हमने हां भर दी।”
इसके बाद वायरल हिस्सा आता है, अमित शाह कहते हैं, “मेरा दायित्व है मान्यवर कि हमने क्यों ना बोली थी। ना बोलने के दो कारण थे। एक कारण था कि चर्चा गहन पुन निरीक्षण के नाम पर वो मानते थे। एसआईआर के नाम पर मानते थे। मान्यवर मेरा बहुत स्पष्ट मत है कि एसआईआर पर इस सदन पर चर्चा नहीं हो सकती। क्योंकि गहन पुन निरीक्षण की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। भारत का चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त ये सरकार के तहत काम नहीं करते। अगर जब चर्चा होती है चर्चा होती है और कुछ सवाल खड़े किए जाएंगे तो इसका जवाब कौन देगा? मान्यवर जब उन्होंने कहा कि हम चुनाव सुधार पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। हम तुरंत मान गए और आज चुनाव सुधार पर ही चर्चा हुई।”
वायरल वीडियो के इस हिस्से में अमित शाह का यह जवाब काट दिया गया जिसमे उन्होंने कहा कि एसआईआर पर इस सदन पर चर्चा नहीं हो सकती। अगर जब चर्चा होती है चर्चा होती है और कुछ सवाल खड़े किए जाएंगे तो इसका जवाब कौन देगा?
इसके बाद अमित शाह ने अपने भाषण में SIR को लेकर सवालों का जवाब भी दिया, उन्होंने कहा, “मान्यवर 63 सदस्यों ने पक्ष और विपक्ष से इस चर्चा में हिस्सा लिया है और जो चर्चा का समय हुआ था तय उससे ज्यादा आपने समय लिया इसलिए भी मैं आपका धन्यवाद व्यक्त करना चाहता हूं। मान्यवर चर्चा तय हुई थी चुनाव सुधारों के लिए मगर ज्यादातर विपक्ष के सदस्यों ने एसआईआर पर ही चर्चा करी। अब चर्चा इन्होंने जिस तरह से शुरू करी है, जवाब तो मुझे देना पड़ेगा। और मैं मानता हूं उनको सुनना भी चाहिए। मान्यवर इस एसआईआर पर गहन पुन निरीक्षण पर एक तरफा चार महीने से झूठ फैलाया और देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास किया और मेरा आग्रह है सदन के पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों मैंने एसआईआर की प्रक्रिया का इससे जुड़े हुए संवैधानिक अनुबंधों का और भूतकाल में जो एसआईआर हुए वह सभी का गहन अभ्यास किया है। मैं आज आपके माध्यम से इस सदन को और सदन के माध्यम से पूरे देश की जनता को जो झूठ विशेषकर कांग्रेस पार्टी द्वारा फैलाया गया है। वह झूठ का मेरे तर्कों के हिसाब से जवाब देना चाहता हूं।”
अमित ने अपने भाषण में SIR को लेकर क्या क्या कहा,
अमित शाह ने क्या-क्या कहा?
- भारत में 1952 से 2004 के बीच कई बार मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण हुआ। उन्होंने 1952, 1957, 1961, 1965-66, 1983-84, 1987-89, 1992-95 और 2002-03 के उदाहरण दिए।
- . 2004 तक किसी भी राजनीतिक दल ने SIR की प्रक्रिया का विरोध नहीं किया था।
- समय-समय पर मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण जरूरी है, ताकि उसमें मौजूद गलतियों को ठीक किया जा सके और चुनाव निष्पक्ष तरीके से हों।
- जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम हटाए जाने चाहिए। एक से अधिक जगह नाम दर्ज होने पर अतिरिक्त नाम हटाए जाने चाहिए और 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले पात्र लोगों के नाम जोड़े जाने चाहिए।
- विदेशी नागरिकों को भारत की मतदाता सूची में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिक होना पहली शर्त है।
- चुनाव आयोग को चुनाव कराने और मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी अनुच्छेद 324 से मिलती है। अनुच्छेद 325 मतदाता सूची में धर्म, जाति आदि के आधार पर भेदभाव रोकता है, जबकि अनुच्छेद 326 मतदाता बनने की पात्रता से संबंधित है।
- अनुच्छेद 327 संसद को चुनाव से जुड़े कानून बनाने का अधिकार देता है और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी इसी संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है।
- 1995 के लाल बाबू हुसैन बनाम मतदाता पंजीकरण अधिकारी मामले का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता का नाम दर्ज करने से पहले उसकी भारतीय नागरिकता की जांच की जा सकती है।
- 2010 में ऐसी व्यवस्था लागू हुई, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर के पास मतदाता सूची से नाम हटाने का अधिकार नहीं रहा। इसी वजह से मृत व्यक्तियों और दूसरे स्थान पर जा चुके लोगों के नाम सूची में बने रहे।
- हरियाणा में 501 मतदाताओं का मामला: राहुल गांधी के एक घर के पते पर 501 मतदाता होने के आरोप पर शाह ने कहा कि संबंधित हाउस नंबर एक एकड़ के पुश्तैनी प्लॉट का था, जहां कई परिवार रहते हैं। उन्होंने इसे फर्जी मतदाताओं का मामला मानने से इनकार किया।
- बिहार में 124 साल उम्र वाली मतदाता का मामला: शाह ने कहा कि संबंधित महिला की उम्र 124 साल दर्ज होने का कारण ऑनलाइन आवेदन में हुई गलती थी। उनके मुताबिक, महिला ने खुद बताया था कि आवेदन भरने में गलती हुई थी।
- कई राजनीतिक नेताओं के नाम गिनाते हुए कहा कि उनके नाम भी दो जगह मतदाता सूची में दर्ज हैं। उन्होंने इसे 2010 के बाद नाम हटाने की प्रक्रिया में आई समस्या से जोड़ा।
- जब विपक्ष चुनाव जीतता है तो चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर सवाल नहीं उठाता, लेकिन चुनाव हारने पर चुनाव आयोग और मतदाता सूची को दोष देने लगता है।
- पिछले चार महीने से SIR के बारे में झूठ फैलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने SIR की प्रक्रिया और उससे जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन किया है।
- कुछ राजनीतिक दलों के हित SIR से प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके अनुसार ऐसे दलों को अवैध विदेशी मतदाताओं के वोट का फायदा मिलता रहा है।
- सरकार की नीति अवैध घुसपैठियों की पहचान करना, मतदाता सूची से उनके नाम हटाना और उन्हें देश से बाहर भेजना है। उन्होंने इसे अपनी सरकार की नीति बताया।
- अगर मतदाता सूची ही गलत होगी तो निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे। उनके मुताबिक, मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
| दावा | अमित शाह सदन में कह चुके हैं कि SIR पर चर्चा नहीं हो सकती। |
| हकीकत | अमित शाह ने 10 दिसंबर 2025 को लोकसभा में यह बयान दिया था कि उनके विचार में SIR पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि इसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। संसद में सवालों के जवाब के लिए चुनाव आयोग नहीं है इसलिए वायरल वीडियो में उनके बयान को गलत तरीके से नहीं जोड़ा गया है। हालांकि, उनके पूरे भाषण में यह भी दर्ज है कि सरकार चुनाव सुधारों पर चर्चा के लिए तैयार हुई थी और उस चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने SIR से जुड़े सवाल उठाए थे। अमित शाह ने खुद अपने भाषण में इसकी पुष्टि की और SIR को लेकर उन सवालों के जवाब भी दिए। |



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