बिहार में कारतूस प्रकरण के आरोपियों की RSS गणवेश में वायरल तस्वीर AI जेनरेटेड है
हाल ही में बिहार के भोजपुर में कारतूसों और पिस्टल के साथ पुलिस ने चंदन तिवारी, सरस कुमार, लाल्टू कुमार को गिरफ्तारी किया। इसी मामले में अप्रैल माह में चंदन के भाई अभिषेक तिवारी को गिरफ्तार किया गया था। इस प्रकरण के सामने आने के बाद सोशल मीडिया में एक तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि गिरफ्तार चारों आरोपी आरएसएस के सदस्य हैं।
क्या लिख रहे हैं लोग?
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक्स पर तस्वीर पोस्ट कर लिखा, ‘बिहार में 𝐑𝐒𝐒 से जुड़े चंदन तिवारी, अभिषेक तिवारी, लालटू कुमार और सरस कुमार से 𝟒𝟒,𝟎𝟎𝟎 जिंदा कारतूस पकड़े गए है। ये लोग गोला-बारूद के अंतरराज्यीय तस्करी के एक खतरनाक नेटवर्क से जुड़े है। क्या 𝐑𝐒𝐒 के ये आतंकवादी देशभर में धमाके करने की साज़िश रच रहे थे? 𝐑𝐒𝐒 से जुड़े तस्करी नेटवर्क के तीन लोगों से ही 𝟒𝟒,𝟎𝟎𝟎 ज़िंदा कारतूस पकड़े जाने के बाद भी क्या 𝐑𝐒𝐒 को आतंकवादी संगठन घोषित नहीं कर देना चाहिए?’
बिहार में 𝐑𝐒𝐒 से जुड़े चंदन तिवारी, अभिषेक तिवारी, लालटू कुमार और सरस कुमार से 𝟒𝟒,𝟎𝟎𝟎 जिंदा कारतूस पकड़े गए है। ये लोग गोला-बारूद के अंतरराज्यीय तस्करी के एक खतरनाक नेटवर्क से जुड़े है। क्या 𝐑𝐒𝐒 के ये आतंकवादी देशभर में धमाके करने की साज़िश रच रहे थे? 𝐑𝐒𝐒 से जुड़े तस्करी नेटवर्क के तीन लोगों से ही 𝟒𝟒,𝟎𝟎𝟎 ज़िंदा कारतूस पकड़े जाने के बाद भी क्या 𝐑𝐒𝐒 को आतंकवादी संगठन घोषित नहीं कर देना चाहिए?
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) November 5, 2026
कंचना यादव ने लिखा, ‘RSS एक आतंकवादी संगठन है। बिहार में आरएसएस से जुड़े चंदन तिवारी, अभिषेक तिवारी, लालटू कुमार और सरस कुमार के पास से 44,000 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। ये लोग गोला-बारूद की अंतरराज्यीय तस्करी के एक खतरनाक नेटवर्क से जुड़े हैं।’
RSS एक आतंकवादी संगठन है। बिहार में आरएसएस से जुड़े चंदन तिवारी, अभिषेक तिवारी, लालटू कुमार और सरस कुमार के पास से 44,000 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। ये लोग गोला-बारूद की अंतरराज्यीय तस्करी के एक खतरनाक नेटवर्क से जुड़े हैं। https://t.co/tWVKXoeVbg
— Dr. Kanchana Yadav (@Kanchanyadav000) November 5, 2026
इसके इलावा संदेश चतुर्वेदी, प्रियंका भारती, डॉ. लक्ष्मण यादव, पवन खेड़ा, अभिमन्यु सिंह, The Credible News, प्रो. मुकेश कुमार, हुसैन हैदरी, डॉ. मायरा, रवीश कुमार ने भी यही दावा किया।
क्या है हकीकत?
हमारी पड़ताल में वायरल तस्वीर में कई संदिग्ध असमानताएं देखने को मिलीं। तस्वीर में कुल 14 लोग नजर आ रहे हैं। इनमें से 1, 7, 8 और 9 नंबर पर मौजूद लोगों के चेहरे एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं। इसी तरह 11 और 12 नंबर पर खड़े लोगों के चेहरों में भी समानता दिखाई देती है। इसके अलावा, तस्वीर में 7 और 8 नंबर पर खड़े युवकों के हाथ में एक-एक लाठी नजर आती है, लेकिन नीचे जमीन की ओर देखने पर ये लाठियां दो अलग-अलग लाठियों में बदलती दिखाई देती हैं। तस्वीर में मौजूद ये असमानताएं इसके AI जनित या AI की मदद से एडिट किए जाने की आशंका पैदा करती हैं।

हमने वायरल तस्वीर की AI डिटेक्शन जांच भी की। जांच के दौरान SynthID वॉटरमार्क डिटेक्ट हुआ। इसके साथ ही टूल ने स्पष्ट किया कि इस मीडिया को OpenAI की मदद से बनाया या एडिट किया गया है। इससे तस्वीर के AI जनित या AI की मदद से एडिट किए जाने की आशंका को और बल मिलता है।

इस संबंध में हमें दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में आरोपियों की तस्वीर भी मिली। हमने इस तस्वीर की तुलना आरएसएस की गणवेश में वायरल हो रही तस्वीर से की। तुलना करने पर स्पष्ट होता है कि दोनों तस्वीरों में मौजूद लोगों के चेहरों का आपस में कोई मेल नहीं है। यानी वायरल तस्वीर में दिख रहे लोग दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में नजर आ रहे आरोपी नहीं हैं।

दैनिक भास्कर की एक अन्य रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि चंदन तिवारी ने अपने छोटे भाई अभिषेक तिवारी उर्फ भोला तिवारी को भी हथियार तस्करी के धंधे में शामिल कर लिया था। पिछले कुछ वर्षों में दोनों के संपर्क बिहार के अलग-अलग जिलों के अपराधियों और हथियार सप्लायरों से बने। चंदन खुद नेटवर्क को संभालता था, जबकि अभिषेक के जरिए हथियार और कारतूस की सप्लाई कराई जाती थी। अभिषेक का नाम मुजफ्फरपुर में पहले भी हथियार बरामदगी के मामलों में सामने आ चुका है। 2026 में अप्रैल महीने में काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र से डीआईयू की टीम ने उसे 200 राउंड कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। उस दौरान उसके साथ एक अन्य आरोपित भी पकड़ा गया था।
अपनी पड़ताल में आगे हमे अभिषेक तिवारी का इन्स्टाग्राम अकाउंट मिला। हालाँकि हमे अभिषेक तिवारी की कोई तस्वीर नहीं मिली लेकिन अभिषेक ने अपनी एक इन्स्टाग्राम पोस्ट में चंदन तिवारी को अपना भाई बताया है, इससे यह पुष्टि होती है कि यह अकाउंट अप्रैल महीने में गिरफ्तार अभिषेक तिवारी का ही है।
पड़ताल के दौरान हमें अभिषेक तिवारी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर वायरल तस्वीर का मूल संस्करण मिला। अभिषेक ने यह तस्वीर 29 मार्च को पोस्ट की थी। मूल तस्वीर में चेहरों और लाठियों में वे असमानताएं नहीं हैं, जो वायरल तस्वीर में दिखाई देती हैं। दरअसल, इसी मूल तस्वीर को AI की मदद से एडिट किया गया, ताकि चारों आरोपियों को आरएसएस की गणवेश में मौजूद लोगों के बीच दिखाया जा सके। इस मूल तस्वीर में चारों आरोपियों में सिर्फ अभिषेक तिवारी स्वयं आरएसएस की गणवेश में नजर आते हैं। इससे यह पुष्टि होती है कि अप्रैल में गिरफ्तार अभिषेक तिवारी गिरफ्तारी से पहले आरएसएस की गतिविधियों से जुड़े थे और संघ की गणवेश में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

पड़ताल के अंत में हमे प्रभार खबर की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली जिसके मुताबिक इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने आरिफ अंसारी और उसकी पत्नी साजिदा खातून को गिरफ्तार किया था, इसके बाद उनसे पूछताछ के दौरान अनिल राउत उर्फ लालू के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी। पुलिस टीम ने सुपौल में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
| दावा | बिहार में कारतूस प्रकरण में गिरफ्तार चारों आरोपी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गणवेश में वायरल तस्वीर में मौजूद हैं। |
| हकीकत | वायरल तस्वीर AI की मदद से एडिटेड पाई गई। असल तस्वीर में सिर्फ अभिषेक तिवारी ही RSS की गणवेश में है। |



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