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4 Oct 2026, Sun

पेरिस में हिंदू संगठन BAPS ने एफिल टॉवर से महिलाओं को हटाने की मांग नहीं की थी

पिछले महीने फ्रांस की राजधानी पेरिस में BAPS (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) पर आरोप लगा कि उसके करीबन 100 संतों के निजी दौरे के दौरान एफिल टावर पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों को कार्यक्रम स्थल से हटने के लिए कहा गया था। इस प्रकरण के सामने आने के बाद BAPS की पूरी दुनिया में आलोचना की गई और हिंदू धर्म को निशाना बनाया गया था। साथ ही पीएम मोदी की भी आलोचना की गयी।

क्या लिख रहें हैं लोग?

पत्रकार उमाशंकर सिंह ने अपने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, “PM मोदी: महिलाओं के विरोधी BAPS के साथ या महिलाओं के साथ?”

पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने लिखा, ‘पेरिस के एफिल टावर में हिन्दू संगठन BAPS की हरकत भारत,भारत की संस्कृति और भारत की पहचान,भारत की प्रगतिशीलता को ख़राब नाम दिया है! सरकार को सख्त बयां देकर ऐसी ओछी हरकत की आलोचना करनी चाहिए! और शाम में देखते हैं, जो स्टूडियो मीडिया विपक्ष के हर बयाना से स्थायी आहत मोड में रहते हैं,वे इस हरकत से आहत दीखते हैं या नहीं!’

सांसद महुआ मोइत्रा ने पोस्ट कर लिखा, “प्रिय @BAPS – बात बहुत सीधी-सी है। अगर आप महिलाओं के आस-पास नहीं रहना चाहते, तो अपने स्वामीनारायण मंदिर के अंदर ही रहें। वह मंदिर काफी अच्छा और बड़ा है। आपको एफिल टॉवर जाने और वहाँ से महिलाओं को हटाने के लिए कहने की क्या ज़रूरत है? इस बेवकूफी से दुनिया भर में भारत को शर्मिंदा न करें।”

तन्मय ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर लिखा, “एफ़िल टॉवर पर महिलाओं को छिपाया गया। फिर पेरिस ने इसे बंद कर दिया। BAPS स्वामीनारायण का एक दल — जो गुजरात का है और नरेंद्र मोदी के करीबी हैं, और एक नए मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए #France में थे जिसकी तारीफ़ उन्होंने वीडियो में की थी — एफ़िल टॉवर घूमने गया। उनके साधु महिलाओं से संपर्क न रखने की शपथ लेते हैं। मैनेजमेंट ने “महिलाओं से बातचीत सीमित करने” की उनकी मांग मान ली। महिला कर्मचारियों से कहा गया कि वे अपनी जगह छोड़ दें, कुछ खास इलाकों से दूर रहें और नज़र न आएं। उनकी जगह पुरुषों को तैनात किया गया। कर्मचारियों ने इसे अपमानजनक बताया। उन्होंने हड़ताल कर दी। टॉवर बंद कर दिया गया। बाद में SETE ने माना कि ऐसी शर्तें कभी नहीं मानी जानी चाहिए थीं। फ्रांस के वामपंथी और दक्षिणपंथी, सभी तरह के नेताओं ने इसे अस्वीकार्य बताया। मामले की जांच चल रही है।”

राजदीप सरदेसाई ने लिखा, “घर पर तो महिला सशक्तिकरण के नारे, लेकिन एफिल टॉवर पर “महिलाओं का प्रवेश वर्जित” क्योंकि हम एक हिंदू धार्मिक समूह हैं? BAPS की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को किनारे रखने की जो बात सामने आई है, उससे भारत की वैश्विक छवि पर बुरा असर पड़ता है। आप घर पर तो ‘नारी शक्ति’ की बात करें और विदेश यात्रा के दौरान ‘नारी बहिष्कार’ करें, ऐसा नहीं हो सकता।”

साध्वी खोसला ने लिखा, “अगर आपका ब्रह्मचर्य का व्रत इतना कमज़ोर है कि किसी औरत को देखने भर से ही वह डगमगा जाए, तो बेहतर है कि आप अपने आश्रम में ही रहें। एफिल टॉवर घूमने क्यों जाते हैं और यह उम्मीद क्यों करते हैं कि औरतें आपके लिए वहाँ से गायब हो जाएँगी? क्या आपके संन्यास में घूमना-फिरना तो मंज़ूर है, लेकिन औरतों का होना नहीं?”

क्या है हकीकत?

पड़ताल में हमें स्थानीय फ्रांसीसी समाचार पत्र Le Parisien की 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के अनुसार, पेरिस नगर की सामान्य निरीक्षण सेवा (IGVP) ने 5 सितंबर को एफिल टॉवर पर हिंदू धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को अलग किए जाने के मामले की जांच की। जांच में स्पष्ट हुआ कि BAPS के प्रतिनिधिमंडल ने पूरे भ्रमण मार्ग से महिलाओं को हटाने की कोई मांग नहीं की थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक, BAPS की मांग केवल धार्मिक प्रतिनिधियों और महिलाओं के बीच शारीरिक संपर्क न होने से संबंधित थी। लेकिन बाद में इस निर्देश का अर्थ अलग-अलग स्तरों पर बदलता गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सूचना कई स्तरों से आगे बढ़ती गई और अलग-अलग स्तरों पर उसे वास्तविक निर्देश मान लिया गया, जबकि उसके लिए उचित अनुमोदन, कानूनी राय या नैतिक समीक्षा नहीं ली गई। यानी जांच के अनुसार यह किसी एक व्यक्ति या BAPS की स्पष्ट मांग का सीधा परिणाम नहीं था, बल्कि निर्देश की व्याख्या, उसके अनुमोदन और उसके क्रियान्वयन में हुई गलतियों की श्रृंखला थी।

रिपोर्ट में एफिल टॉवर की संचालन कंपनी SETE के महानिदेशक पैट्रिक ब्रांको रुइवो का पक्ष भी दिया गया है। उन्होंने कर्मचारियों को भेजे संदेश में दोहराया कि उन्होंने किसी भी समय महिला कर्मचारियों को हटाने या उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को रखने का निर्देश नहीं दिया था।

इसके अलावा टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट में भी बताया गया है कि पेरिस सिटी के जनरल इंस्पेक्टर की जांच में BAPS की ओर से महिला कर्मचारियों को हटाने का कोई स्पष्ट अनुरोध नहीं किया गया था। मांग सिर्फ धार्मिक प्रतिनिधियों और महिलाओं के बीच शारीरिक संपर्क से बचने से संबंधित थी, और वह भी लिखित रूप में नहीं थी। मौखिक रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचते-पहुंचते मूल संदेश का अर्थ ही बदल गया, जिसके कारण यह स्थिति पैदा हुई।

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