पिछले महीने फ्रांस की राजधानी पेरिस में BAPS (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) पर आरोप लगा कि उसके करीबन 100 संतों के निजी दौरे के दौरान एफिल टावर पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों को कार्यक्रम स्थल से हटने के लिए कहा गया था। इस प्रकरण के सामने आने के बाद BAPS की पूरी दुनिया में आलोचना की गई और हिंदू धर्म को निशाना बनाया गया था। साथ ही पीएम मोदी की भी आलोचना की गयी।
क्या लिख रहें हैं लोग?
पत्रकार उमाशंकर सिंह ने अपने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, “PM मोदी: महिलाओं के विरोधी BAPS के साथ या महिलाओं के साथ?”
PM मोदी महिला विरोधी BAPS के साथ या महिलाओं के साथ? pic.twitter.com/P1YS7Hr0zl
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) September 9, 2026
पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने लिखा, ‘पेरिस के एफिल टावर में हिन्दू संगठन BAPS की हरकत भारत,भारत की संस्कृति और भारत की पहचान,भारत की प्रगतिशीलता को ख़राब नाम दिया है! सरकार को सख्त बयां देकर ऐसी ओछी हरकत की आलोचना करनी चाहिए! और शाम में देखते हैं, जो स्टूडियो मीडिया विपक्ष के हर बयाना से स्थायी आहत मोड में रहते हैं,वे इस हरकत से आहत दीखते हैं या नहीं!’
पेरिस के एफिल टावर में हिन्दू संगठन BAPS की हरकत भारत,भारत की संस्कृति और भारत की पहचान,भारत की प्रगतिशीलता को ख़राब नाम दिया है! सरकार को सख्त बयां देकर ऐसी ओछी हरकत की आलोचना करनी चाहिए!
— Narendra Nath Mishra (@iamnarendranath) September 8, 2026
और शाम में देखते हैं, जो स्टूडियो मीडिया विपक्ष के हर बयाना से स्थायी आहत मोड में रहते…
सांसद महुआ मोइत्रा ने पोस्ट कर लिखा, “प्रिय @BAPS – बात बहुत सीधी-सी है। अगर आप महिलाओं के आस-पास नहीं रहना चाहते, तो अपने स्वामीनारायण मंदिर के अंदर ही रहें। वह मंदिर काफी अच्छा और बड़ा है। आपको एफिल टॉवर जाने और वहाँ से महिलाओं को हटाने के लिए कहने की क्या ज़रूरत है? इस बेवकूफी से दुनिया भर में भारत को शर्मिंदा न करें।”
Dear @BAPS – it’s very simple. If you don’t want to be around women stay inside your own Swaminarayan temple. It is nice enough & large enough. Why do you need to visit the Eiffel Tower & ask that women be removed? Don’t embarrass India globally with this lunacy. https://t.co/zfmROAapNc
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) September 8, 2026
तन्मय ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर लिखा, “एफ़िल टॉवर पर महिलाओं को छिपाया गया। फिर पेरिस ने इसे बंद कर दिया। BAPS स्वामीनारायण का एक दल — जो गुजरात का है और नरेंद्र मोदी के करीबी हैं, और एक नए मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए #France में थे जिसकी तारीफ़ उन्होंने वीडियो में की थी — एफ़िल टॉवर घूमने गया। उनके साधु महिलाओं से संपर्क न रखने की शपथ लेते हैं। मैनेजमेंट ने “महिलाओं से बातचीत सीमित करने” की उनकी मांग मान ली। महिला कर्मचारियों से कहा गया कि वे अपनी जगह छोड़ दें, कुछ खास इलाकों से दूर रहें और नज़र न आएं। उनकी जगह पुरुषों को तैनात किया गया। कर्मचारियों ने इसे अपमानजनक बताया। उन्होंने हड़ताल कर दी। टॉवर बंद कर दिया गया। बाद में SETE ने माना कि ऐसी शर्तें कभी नहीं मानी जानी चाहिए थीं। फ्रांस के वामपंथी और दक्षिणपंथी, सभी तरह के नेताओं ने इसे अस्वीकार्य बताया। मामले की जांच चल रही है।”
𝐖𝐨𝐦𝐞𝐧 𝐇𝐢𝐝𝐝𝐞𝐧 𝐚𝐭 𝐭𝐡𝐞 𝐄𝐢𝐟𝐟𝐞𝐥 𝐓𝐨𝐰𝐞𝐫. 𝐓𝐡𝐞𝐧 𝐏𝐚𝐫𝐢𝐬 𝐒𝐡𝐮𝐭 𝐈𝐭 𝐃𝐨𝐰𝐧.
— তন্ময় l T͞anmoy l (@tanmoyofc) September 8, 2026
A BAPS Swaminarayan delegation — Gujarat-based, close to #NarendraModi, in #France to Consecrate a New Temple He Praised On Video — Visited The Eiffel Tower.
Their Monks… pic.twitter.com/niN8MStzSC
राजदीप सरदेसाई ने लिखा, “घर पर तो महिला सशक्तिकरण के नारे, लेकिन एफिल टॉवर पर “महिलाओं का प्रवेश वर्जित” क्योंकि हम एक हिंदू धार्मिक समूह हैं? BAPS की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को किनारे रखने की जो बात सामने आई है, उससे भारत की वैश्विक छवि पर बुरा असर पड़ता है। आप घर पर तो ‘नारी शक्ति’ की बात करें और विदेश यात्रा के दौरान ‘नारी बहिष्कार’ करें, ऐसा नहीं हो सकता।”
Women’s empowerment slogan at home, but “NO WOMEN, PLEASE” at the Eiffel Tower because we are a Hindu religious group? The reported sidelining of women staff during the BAPS visit does very little for India’s global image. You cannot preach Nari Shakti at home while practising Nari Bahishkar when you travel abroad. https://t.co/AWMRYGe0mi
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) September 8, 2026
साध्वी खोसला ने लिखा, “अगर आपका ब्रह्मचर्य का व्रत इतना कमज़ोर है कि किसी औरत को देखने भर से ही वह डगमगा जाए, तो बेहतर है कि आप अपने आश्रम में ही रहें। एफिल टॉवर घूमने क्यों जाते हैं और यह उम्मीद क्यों करते हैं कि औरतें आपके लिए वहाँ से गायब हो जाएँगी? क्या आपके संन्यास में घूमना-फिरना तो मंज़ूर है, लेकिन औरतों का होना नहीं?”
If your vow of celibacy is so fragile that even the sight of a woman can disturb it, better stay inside your ashram. Why go sightseeing at the Eiffel Tower and expect women to disappear for you? Is sightseeing allowed in your renunciation, but women are not?
— Sadhavi Khosla (@sadhavi) September 9, 2026
क्या है हकीकत?
पड़ताल में हमें स्थानीय फ्रांसीसी समाचार पत्र Le Parisien की 1 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के अनुसार, पेरिस नगर की सामान्य निरीक्षण सेवा (IGVP) ने 5 सितंबर को एफिल टॉवर पर हिंदू धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को अलग किए जाने के मामले की जांच की। जांच में स्पष्ट हुआ कि BAPS के प्रतिनिधिमंडल ने पूरे भ्रमण मार्ग से महिलाओं को हटाने की कोई मांग नहीं की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, BAPS की मांग केवल धार्मिक प्रतिनिधियों और महिलाओं के बीच शारीरिक संपर्क न होने से संबंधित थी। लेकिन बाद में इस निर्देश का अर्थ अलग-अलग स्तरों पर बदलता गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सूचना कई स्तरों से आगे बढ़ती गई और अलग-अलग स्तरों पर उसे वास्तविक निर्देश मान लिया गया, जबकि उसके लिए उचित अनुमोदन, कानूनी राय या नैतिक समीक्षा नहीं ली गई। यानी जांच के अनुसार यह किसी एक व्यक्ति या BAPS की स्पष्ट मांग का सीधा परिणाम नहीं था, बल्कि निर्देश की व्याख्या, उसके अनुमोदन और उसके क्रियान्वयन में हुई गलतियों की श्रृंखला थी।
रिपोर्ट में एफिल टॉवर की संचालन कंपनी SETE के महानिदेशक पैट्रिक ब्रांको रुइवो का पक्ष भी दिया गया है। उन्होंने कर्मचारियों को भेजे संदेश में दोहराया कि उन्होंने किसी भी समय महिला कर्मचारियों को हटाने या उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को रखने का निर्देश नहीं दिया था।
इसके अलावा टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट में भी बताया गया है कि पेरिस सिटी के जनरल इंस्पेक्टर की जांच में BAPS की ओर से महिला कर्मचारियों को हटाने का कोई स्पष्ट अनुरोध नहीं किया गया था। मांग सिर्फ धार्मिक प्रतिनिधियों और महिलाओं के बीच शारीरिक संपर्क से बचने से संबंधित थी, और वह भी लिखित रूप में नहीं थी। मौखिक रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचते-पहुंचते मूल संदेश का अर्थ ही बदल गया, जिसके कारण यह स्थिति पैदा हुई।
| दावा | वैश्विक हिंदू संगठन BAPS ने एफिल टावर से अपने दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को वहाँ से हटाने की माँग की। |
| हकीकत | BAPS ने इस तरह की कोई बात नहीं की एफ़िल टावर की। संचालन कंपनी SETE ने माना की इस निर्णय में संचालन संबंधी खामियाँ थी। बात एक व्यक्ति से दूसरे तक मौखिक रूप में पहुँची जिससे बात का अर्थ ही बदल गया। |

