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13 Jun 2026, Sat

कानपुर में युवकों को पीटने की घटना में जातिगत एंगल नहीं है

कानपुर में गंगा में नहाने पर पुजारी द्वारा युवकों को पीटने की घटना में जातिगत एंगल नहीं है

उत्तर प्रदेश के कानपुर में कुछ युवकों को पीटने का वीडियो वायरल है। घटना को जातिगत एंगल देते हुए दावा किया जा रहा है कि पुजारी ने गंगा में नहाने पर दलित युवकों की पिटाई कर दी। हालाँकि हमारी पड़ताल में यह दावा भ्रामक निकला।

क्या लिख रहे हैं लोग?

जे कपूर ने लिखा, ‘गंगा घाट पर दलित युवकों की पिटाई! सिर्फ जाति बनी जुर्म? जो लोग कहते हैं कि जातिवाद खत्म हो गया है, उन्हें कानपुर की यह तस्वीर जरूर देखनी चाहिए। गंगा स्नान करने पहुंचे युवकों पर किस तरह वहां के पुजारी और नाबालिक लडके लगातार डंडे बरसा रहे हैं, उनका दोष बस इतना है कि वो दलित हैं। किस तरह बेरहमी से उन पर डंडे बरसाए जा रहे हैं। यह सिर्फ मारपीट नहीं बल्कि संविधान और सामाजिक समानता पर सीधा हमला है।’

कांग्रेस नेता डॉ. अरुणेश यादव ने एक्स पर वीडियो को शेयर कर लिखा, ‘गुनाह – दलित होना इनको सिर्फ इसलिए पीट रहे हैं क्योंकि ये दलित होकर गंगा घाट पर पहुंच गए!!’

प्रवीण नाम के एक्स हैंडल ने वीडियो को शेयर कर लिखा, ‘इनका कसूर सिर्फ इतना है कि ये दलित हैं। गंगा घाट पर नहाने का हक़ जताया, और यही कुछ लोगों को बर्दाश्त नहीं हुआ। गंगा सबकी है, ये तो बस जुमला है।’

सुर्याजीत प्रसाद ने फेसबुक पर लिखा, ‘यह जाति है कि जाती नहीं…… कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र में गंगा घाट पर मंदिर के पुजारी और उसके शिष्यों द्वारा दलित समाज के दो युवकों (रामदीन पुत्र बेचेलाल दिवाकर) और (पप्पू पुत्र छेदीलाल पासवान) के साथ कथित मारपीट की घटना बेहद निंदनीय है ! गंगा किसी एक व्यक्ति, जाति या वर्ग की नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है। कानून के अनुसार दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए’

वहीं रोहित , विश्व गुरु और प्रवीण नाम के एक्स हैंडल ने भी वीडियो को जातिगत एंगल देते हुए शेयर किया है।

क्या है हकीकत?

दावे की पड़ताल में संबंधित कीवर्ड्स से खोज करने पर हमें मामले से जुड़ी दैनिक भास्कर की रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र का है। जहां एक एक पुजारी और कुछ किशोरों द्वारा दो युवकों को लाठी-डंडों से पीटने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। यह घटना ड्योढ़ी गंगा घाट की बताई जा रही है।

Source: Dainik Bhaskar

रिपोर्ट में पीड़ित रामदीन पुत्र बेचेलाल दिवाकर और पप्पू पुत्र छेदीलाल पासवान ने बताया कि वे बुधवार को मछली पकड़ने के लिए ड्योढ़ी घाट से करीब एक किलोमीटर दूर जमदा गांव के पास गंगा नदी गए थे। उनका आरोप है कि इसी दौरान एक स्टीमर से पुजारी सहित लगभग आधा दर्जन लोग वहां पहुंचे और मछली पकड़ने का विरोध करने लगे। इसके बाद दोनों युवकों को जबरन स्टीमर में बैठाकर ड्योढ़ी गंगा घाट ले जाया गया, जहां उनके साथ लाठी-डंडों से मारपीट की गई। फिलहाल, पुलिस ने सलेमपुर निवासी पीड़ित रामदीन की शिकायत पर गोलू उर्फ संदीप तथा तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पड़ताल में आगे हमें इस घटना की एफआईआर कॉपी मिली। पीड़ित रामधीन ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया है कि 8 जून को गंगा स्नान के दौरान कुछ लोग उन्हें स्टीमर से जबरन द्योती घाट मंदिर के पास ले गए, जहां गोलू उर्फ संदीप और उसके साथियों ने प्लास्टिक के डंडों व बांस से उनकी पिटाई की। पीड़ितों का कहना है कि हाथ-पैर जोड़कर गुहार लगाने के बाद उन्हें छोड़ा गया जबकि आरोपियों ने जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं पीड़ित ने एफआईआर में कहीं भी जाति की वजह से पीटने की बात नहीं कही है।

एफआईआर कॉपी

पड़ताल में आगे हमने महाराजपुर थाना के इंस्पेक्टर राजेश कुमार से संपर्क किया। राजेश कुमार ने हमें बताया कि पीड़ित पक्ष घाट पर मछली पकड़ने गए थे। वहां लोग मछली मारने व पकड़ने के खिलाफ हैं। इस वजह से पुजारी ने उनका विरोध किया। दलित होने की वजह से गंगा में नहाने से रोकने वाली कोई बात नहीं है। गंगा घाट पर नहाने से किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है, न ही किसी को नहाने से रोका जाता है। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

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