उत्तर प्रदेश का हाथरस कांड एक बार फिर चर्चा में है। हाथरस में 14 सितंबर 2020 को एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा था हालाँकि जांच में यह मामला झूठा साबित हुआ। अब इस कांड को लेकर एक ओटीटी प्लेटफार्म पर डॉक्यूमेंट्री रिलीज हुई है। डॉक्यूमेंट्री को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए हाथरस प्रकरण की दोबारा जांच की मांग की है।
कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा के मुताबिक हाथरस मामले पर बनी डॉक्यूमेंट्री में कई लोगों के बयान शामिल हैं। इस डॉक्यूमेंट्री में गाइनिकॉलोजिस्ट तक कह रहीं हैं कि 👇 • बच्ची को लाने से पहले सारे सबूत मिटा दिए गए थे • बच्ची को नहला दिया गया था, उसे साफ कर दिया गया था लेकिन उन्हें भरोसा था कि जांच में सच सामने आ जाएगा। बच्ची तक ने यह बयान दिया था कि उसके साथ गलत हुआ है, लेकिन उसके बयान को consider नहीं किया गया। केस को पुलिस द्वारा कमजोर कर दिया गया, ताकि आरोपी बच सके। गाइनिकॉलोजिस्ट यह भी कह रही हैं कि शायद पुलिस न्याय दिलवाना ही नहीं चाहती थीं। इस घटना के 8 दिन बाद सबूत जुटाए गए थे और Crucial evidence कोर्ट में पेश नहीं किये गए, जो आरोपियों को फांसी के तख्ते तक पहुंचा सकते थे।
हाथरस मामले पर बनी डॉक्यूमेंट्री में कई लोगों के बयान शामिल हैं। इस डॉक्यूमेंट्री में गाइनिकॉलोजिस्ट तक कह रहीं हैं कि 👇
— Congress (@INCIndia) May 21, 2026
• बच्ची को लाने से पहले सारे सबूत मिटा दिए गए थे
• बच्ची को नहला दिया गया था, उसे साफ कर दिया गया था
लेकिन उन्हें भरोसा था कि जांच में सच सामने आ जाएगा।… pic.twitter.com/1sq2QM0bEp
क्या है हकीकत?
हाथरस के थाना चन्दपा के एक गांव निवासी युवक ने 14 सितम्बर 2020 को अपनी एक लिखित शिकायत में कहा, ‘मेरी बहन और मेरी मम्मी घास लेने के लिये गये थे, मैं घास डालने घर गया था। मेरी मम्मी कुछ दूरी पर घास काट रही थी। मेरी बहन “पीड़िता” थोड़ी दूर पर बाजरा के खेत में में से सन्दीप पुत्र ठा. गुड्डू ने जान से मारने की नीयत से मेरी बहन का गला दबा दिया तथा मारने की पूरी कोशिश की फिर मेरी बहन चिल्लाई तो मेरी माँ ने आवाज दी कि मैं आ रही हूँ। सन्दीप आवाज सुनकर वहाँ से छोडकर भाग गया। यह घटना समय करीब 09:30 बजे सुबह की है। मेरी रिपोर्ट लिखकर कार्यवाही की जाये। मैं जाति से बाल्मीकि हूँ।’

घटना के बाद थाना चन्दपा पहुचीं पीडिता ने अपने पहले बयान में बताया कि संदीप ने जबर्दस्ती करने की कोशिश की जब मना किया तो उसने हाथों से गला दबा दिया। पीडिता कहती है कि पापा मेरे सीधे-सादे हैं, यह मेरा रोज(खेत में मजदूरी) का काम है। इस वीडियो में पीड़िता की माँ भी बता रही है कि लड़की के पास में थी।
वहीं जब लड़की को अस्पताल ले जाया गया तो पीड़िता ने वीडियो में बताया कि वो घास छीलने गयी थी, संदीप ने जबर्दस्ती करने की कोशिश की जब मना किया तो गला दबा दिया। पीडिता ने यह भी बताया कि आरोपी लड़के पक्ष से उनकी रंजिश चल रही है। इसी वीडियो में पीडिता की मां बोल रही है कि गांव में मामूली बात पर विवाद हुआ था। बेटी घास लेने गयी थीं, वहीं मारपीट हो गयी। संदीप ने पीछे से आकर बाल खींचे और गला दबाया दिया। माँ ने कहा कि हमले में केवल एक ही लड़का था, जिसका नाम संदीप और पिता का नाम गुड्डू है। पीडिता की माँ ने यह भी बताया उनकी आरोपी पक्ष से रंजिश चल रही है।
वहीं अस्पताल पहुँचने पहले कोतवाली में लड़की की माँ ने बयान दिया। इस वीडियो में पीडिता की बयान देते हुए कहती है कि हम दोनों घास काट रहे थे, हम दोनों आगे पीछे साथ थे। लड़के का नाम संदीप है।
अदालत में क्या बयान हुए?
सीबीआई विवेचक द्वारा पूछताछ में ‘अमर तनाव’ के पत्रकार गोविन्द कुमार शर्मा ने बताया, ‘14.09.2020 को सुबह के वक्त चन्दपा थाने में मैने पीड़िता से बात कर उसके 4 वीडियो बनाये थे। वीडियो में पीडिता भली-भॉति बोल रही है एवं उसकी आवाज साफ है तथा पीडिता होश में है तथा बेहोश नहीं है और हर पूछे गये प्रश्नों का सटीक जवाब दे रही है। मेरे वीडियो के अन्दर जब पीडिता की माँ से पूछा गया “क्या किया उसने” तो इसके जवाब में पीड़िता की माँ ने कहा “भयो कछु नाय” और यह भी कहा है कि “मैं तो मारा-मार चिपटी बाय”। वीडियो में पुलिस अधिकारी एसओ डीके वर्मा तथा एसएसआई जगवीर सिंह भी पीडिता व पीड़िता की माँ से पूछताछ करते हुए नजर आ रहे हैं तथा पीडिता व पीडिता की माँ अपने पूरे होशो-हवाश में जवाब दे रही है। पीड़िता केवल एक ही नाम संदीप बता रही है।‘
हिंदी खबर के पत्रकार रवि कुमार ने बताया कि 14.09.2020 को सुबह 11:40 बजे बागला जिला अस्पताल, हाथरस में मैने, पीड़िता व उसकी माता से बात कर उसका 03 वीडियो बनाए थे। पीडिता बोल रही है, होश में है, प्रश्नों के सटीक जवाब दे रही है तथा एक ही नाम सन्दीप बता रही है। पीड़िता ने इस वीडियो में बलात्कार या सामूहिक बलात्कार का आरोप नहीं लगाया है। उसी दिन और उसी समय मैंने उसी स्थान पर पीड़िता की माँ का भी वीडियो बनाया था, जिसमें उसने मारपीट का होना बताया था। इस वीडियो में पीडिता की माँ ने 14-15 साल पूर्व की रंजिश होना बताया है।
होमगार्ड शिव कुमार ने बताया कि थाना चन्दपा से टेम्पो में मैं, कान्स्टेबल नेहा के साथ पीड़िता को लेकर के बागला जिला अस्पताल हाथरस पहुंचे। वहाँ पहुंचकर पीड़िता को इमरजेंसी में भर्ती कराया। टैम्पों में मेरे साथ पीड़िता की माताजी के साथ 4-5 अन्य सवारिया बैठी हुई थी तथा पीडिता का भाई मोटरसाईकिल पर एक व्यक्ति को बैठाकर पीछे-पीछे आ रहा था। उस दौरान अस्पताल एवं थाने में कुछ पत्रकार, मीडिया वाले पीड़िता से पूछताछ व उसका वीडियो बना रहे थे। मेरे सामने पीड़िता ने चोट के विषय में बताया था कि गाँव के लड़के सन्दीप ने रंजिश की वजह से दुपट्टा खींच लिया था। शिव कुमार ने अपनी प्रतिपरीक्षा में कहा है कि थाने में तथा बागला जिला अस्पताल में पीडिता पत्रकारों द्वारा पूछे गये प्रश्नों का सटीक उत्तर दे रही थी और वह बेहोश नहीं थी। थाने से बागला जिला अस्पताल ले जाते समय पीडिता बोल रही थी और बिल्कुल सही लग रही थी।
महिला सिपाही नेहा बताया कि रास्ते में न तो लडकी ने और न ही लडकी की माँ ने बलात्कार होने की बात बतायी थी | मैंने रास्ते में उसकी माँ से पूछा था कि लडकी के साथ कोई ऐसी-वैसी बात तो नहीं हुई है। इस पर लडकी की माँ ने मना कर दिया था। जिस समय मैंने लडकी की माँ से यह पूछा था उस समय पीड़िता भी उसके पास लेटी हुई थी। पीड़िता को मैंने थाने से ऑटो द्वारा अस्पताल ले जाते हुये देखा था, उसकी स्थिति तथा कपड़ों की स्थिति से यह प्रतीत नहीं होता था कि पीड़िता के साथ कोई बलात्कार या सामूहिक बलात्कार हुआ हो।
बागला जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डा. रमेश बाबू ने बताया कि मैंने मजरूबी चिट्ठी के अनुसार पीड़िता का प्राथमिक उपचार किया तथा उसकी गम्भीर स्थिति के सम्बन्ध में उसके परिवार वालों को अवगत कराया एवं गम्भीर गले की चोंट के कारण उसे JNMC रेफर किया। उस दौरान पीड़िता के साथ Sexual Assault के सम्बन्ध में कोई जानकारी मेरे सामने पीड़िता व उसके परिवार वालों के द्वारा मेरी जानकारी में नही लायी गयी थी, न ही मजरूबी चिट्ठी में ऐसा कुछ लिखा था। वैसे भी गले की चोट को देखते हुए उसकी स्थिति के अनुसार उसे अलीगढ़ मेडीकल कॉलेज रेफर किया गया। जेएनएमसी अलीगढ़ अस्पताल के स्टाफ नर्स जफर आलम ने अपने बयान में बताया है कि पीड़िता 14.09.2020 को इमरजेन्सी ट्रायेज में रेफर पर लायी गयी थी। उस दौरान पीड़िता गले में दर्द बता रही थी, प्राथमिक उपचार के बाद उसे आपातकाल के रिक्वरी वार्ड में भर्ती कर दिया गया था। उस दौरान पीड़िता एवं उसके परिवार वालों ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म होने की बात नहीं बताई।
जेएनएमसी अलीगढ़ अस्पताल के रिक्वरी वार्ड में तैनात नर्सिंग ऑफिसर सना सुबूर ने कहा है कि पीड़िता हमारे यूनिट में 14.092020 से 21.09.2020 को 4:00 बजे थी। पीड़िता के उपचार के दौरान 2-3 दिन ड्यूटी पर रही। उस दौरान पीड़िता गले में दर्द और बेचैनी बता रही थी तथा बार-बार पानी मांग रही थी। उस दौरान पीड़िता एवं उसके परिवार वालों ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म होने की बात मुझे नहीं बताई। जेएनएमसी अलीगढ़ अस्पताल में तैनात नर्सिंग ऑफिसर नौसाबा हैदर ने अपने बयान में कहा है कि 22.09.2020 को सुबह 10:00 बजे पीड़िता एवं पीडिता की माँ ने मुझे पहली बार Sexual Assault के बारे में बताया था, उस समय पीडिता की मॉं अधिक बोल रही थी, लडकी कम बोल रही थी। पीड़िता ने आक्सीजन मास्क लगाया हुआ था। मैंने, पीडिता व पीडिता की माँ से यह भी पूछा था कि यह बात(Sexual Assault) आपने पहले क्यों नहीं बतायी। आप पहले ही बता देती तो इस पर दोनों चुप हो गयी थीं।
जेएनएमसी अलीगढ़ अस्पताल में डिपार्टमेन्ट ऑफ न्यूरो सर्जरी के प्रोफसर एण्ड चेयरमैन डॉ. एमएफ हुदा ने अपने बयान में कहा कि 14.09.2020 को जब मरीज को लाया गया तब उस दौरान मरीज व उसके परिवारीजन द्वारा गला घोंटने के द्वारा चोट की बात कही गयी थी। उस समय न तो मरीज ने न उसके साथ आये परिजनों ने उसके यौन उत्पीड़न की बात बताई थी।
महिला कांस्टेबल रश्मि ने बताया है कि 19.09.2020 को सीओ साहब के साथ मेडिकल कॉलेज गयी थी। सीओ साहब नें डॉक्टर साहब से कुछ बात की और फिर हम लोग पीड़िता के पास उसके वार्ड पहुंचे। पीड़िता के पास जब हम पहुंचे तो उसके परिवार वाले उसके साथ वहाँ मौजूद थे। पीड़िता को ऑक्सीजन मॉस्क लगा हुआ था तथा वह अपने बेड पर लेटी हुई थी। सीओ साहब ने पीड़िता से पूछताछ के बाद बयान की कार्यवाही शुरू हुई। पीड़ित ने बयान में बताया कि मेरा गला दबाने से पहले मेरे साथ छेड़खानी की गयी थी। रश्मि ने अपनी प्रतिपरीक्षा में कहा कि यह सही है कि पीडिता अपना बयान दर्ज कराते हुये पूरे होशो-हवाश में थी। वह पूछे गये सवालों का स्वयं जवाब दे रही थी। पीड़िता ने अभियुक्त संदीप के अलावा अन्य किसी व्यक्ति का हमलावर के तौर पर नाम नहीं लिया। पीडिता ने बलात्कार की बात नहीं कही है, केवल छेडखानी की बात कही।
तत्कालीन थाना प्रभारी चंदपा दिनेश कुमार वर्मा ने कोर्ट में बताया है कि पीड़िता को मैं थाने परिसर में देखा था। वह होश में थी, बोल रही थी, प्रश्नों के जवाब दे रही थी। पीडिता के शरीर व कपड़ों पर कोई भी बहता हुआ खून नहीं था। पीडिता व उसके परिजनों ने अभियुक्त व उसके परिवार वालों से पुरानी रंजिश का होना बताया था। पत्रकारों एवं एसएसआई जगवीर सिंह द्वारा वीडियो बनाये जाते समय पीडिता पूछे गये सवालों को समझकर स्वेच्छा से स्वयं जवाब दे रही थी और उस समय पीड़िता या उसके किसी परिवारजन ने पीड़िता के साथ कोई रेप या गैंग रेप की घटना के सम्बन्ध में नहीं बताया था। मैं, धीरेन्द्र एसआई व महिला कां. रूचि के साथ गाव बूलगढी गया था तो मुझे अभियुक्त रवि व लवकुश गाँव में ही उपस्थित मिले थे। दिनांक 21.09.2020 तक मुझे, पीडिता या उसके किसी परिवारीजन अथवा किसी पुलिसकर्मी द्वारा पीडिता के साथ रेप या गैंग रेप के सम्बन्ध में नहीं बताया गया था। सन्दीप की गिरफतारी दिनांक 20.09.2020 को 10:45 बजे सुबह बूलगढी मोड आगरा रोड से की थी, जो थाना चन्दपा से लगभग 400 मीटर की दूरी पर है। अभियुक्त ‘लवकुश की गिरफ्तारी दिनांक 23.09.2020 को सुबह 06:50 पर नगला भूस तिराहा से एसआई धीरेन्द्र सिंह द्वारा की गयी थी, जो थाना चन्दपा से मात्र 200-300 मीटर की दूरी पर है। अभियुक्त रवि की गिरफ्तारी दिनांक 25.09.2020 को सुबह 08:55 बजे बघना रोड चन्दपा मोड से की गयी थी, जो थाना चन्दपा के पास ही स्थित है। अभियुक्त रामू की गिरफ्तारी दिनांक 26.09.2020 को 08:55 बजे सटीकरा मोड आगरा रोड से की गयी थी, जो थाने के निकट ही है।
क्या सबूत मिटाए गये?
जेएनएमसी अलीगढ़ अस्पताल में डिपार्टमेन्ट ऑफ न्यूरो सर्जरी के प्रोफसर एण्ड चेयरमैन डॉ. एमएफ हुदा का कहना है कि 14 सितम्बर को ही पेशाब के लिए नली लगाई गयी थी। यूरेथा के माध्यम से जब पेशाब की नली लगायी गयी होगी तो उसके जननांग को निश्चित रूप से देखा गया होगा क्योंकि उसके बगैर नली लगाना सम्भव नहीं है। उस समय उसके जननांगों में कोई चोट या Sexual Assault का कोई लक्षण अंकित नहीं किया गया। अगर इस तरह का Sexual Assault का कोई लक्षण देखा गया होता तो निश्चित ही अंकित किया जाता।
जेएनएमसी अलीगढ़ अस्पताल में विधि विज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. फैयाज अहमद ने अपने बयान में कहा है कि दिनांक 22.09.2020 को करीब 11:30 बजे हमारे विधि विज्ञान विभाग को लिखित रिक्यूजिशन न्यूरो सर्जरी विभाग से प्राप्त हुआ था कि किसी दुष्कर्म पीडिता का मेडिकल एग्जामिनेशन होना है। पीडिता की जांच के लिये गाइनो डिपार्टमेण्ट एवं हमारे विभाग की संयुक्त टीम बनायी गयी थी और उसी दिन हम लोगों ने 12:30 बजे पीडिता का परीक्षण किया। पीडिता से सम्बन्धित मेडिकल अभिलेखों में उसके साथ दुष्कर्म का कोई हवाला नहीं था, हमने पीड़िता से पूछा तो वह चुप हो गयी। इसके बाद पीड़िता व उसकी माँ से लिखित अनुमति प्राप्त करने के बाद उसका परीक्षण शुरू हुआ। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार पीडिता के साथ कोई भी वेजाईनल/एनल इण्टरकोर्स का चिन्ह दृष्टिगोचर नहीं हुआ था।
जेएनएमसी अलीगढ़ अस्पताल में स्त्री रोग विभाग की असिस्टेण्ट प्रोफेसर डॉ. डालिया राफत ने अपने बयान में कहा है कि एग्जामिनेशन होना है। पीड़िता की जॉच के लिये हमारे गाइनो डिपार्टमेन्ट एवं विधि विज्ञान विभाग की संयुक्त टीम बनायी गयी थी और उसी दिन हम लोगों ने 12:30 बजे पीड़िता का परीक्षण किया। पीडिता से सम्बन्धित मेडिकल अभिलेखों में उसके साथ दुष्कर्म का कोई हवाला नहीं था, इस सम्बन्ध में हमने पीडिता से पूछा तो वह चुप हो गयी।
इसके बाद पीडिता व उसकी माँ से लिखित अनुमति प्राप्त करने के बाद उसका परीक्षण शुरू हुआ। इस दौरान वह होश में थी, वह बातचीत कर रही थी। हैं। मेरे सामने पीडिता ने अपनी आयु 18 वर्ष बतायी थी। पीड़िता ने अपने साथ चार लोगों द्वारा वेजाईनल इण्टरकोर्स की बात मेरे समक्ष बतायी थी तथा चार व्यक्तियों पूर्ण वेजाईनल इण्टरकोर्स पेनिस के द्वारा बताया गया एवं हमलावरों की उम्र लगभग 19 से 20 साल बतायी थी। इसके बावजूद भी पीडिता के जननांगों पर कोई रेडनेस, स्वलिंग, टेंडरनेस, ‘एब्रेजन, कन्टूजन, लेसरेशन्स नहीं पाये गये थे। पीडिता के जननांगों के भागों पर कोई भी टियर ऑन लेबिया, मेजोरा, लेबिया माईनोरा, यूरेथ्रा हाईमन, वेजाईना सविक्स, फोरसिट एण्ड पेरीनियम या कोई अन्य फ्रेश इंजरी नहीं पायी गई। मैं नहीं कह सकती कि कोई ओल्ड इंजरी थी या नहीं। हमारी गाईड लाईन्स में यह निर्देशित है कि सेक्सुअल असाल्ट इग्जामिनेशन में ओल्ड इंजरी मेंशन नहीं किया जाये। पीडिता के जननांग नार्मल थे, कोई भी एबनार्मलिटी नहीं थी।
सीबीआई विवेचनाधिकारी/अपर पुलिस अधीक्षक सीमा पाहूजा ने बयान में कहा है कि एफएसएल आगरा की रिपोर्ट में पीडिता के शरीर से फारेन बाईलोजिकल मटेरियल के रूप में Sperm and Semen मौजूद नहीं पाये गये। पीड़िता के कपड़ों पर भी वीर्य व शुकाणु सीएफएसएल रिपोर्ट के मुताबिक नहीं पाये गये थे। एमआईएमबी की रिपोर्ट के अनुसार पीडिता दिनांक 22.09.2020 को जेएनएमसी अलीगढ में परीक्षण के समय मासिक श्राव की स्थिति में नहीं थी परन्तु दिनांक 29.092020 को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार वह मासिक श्राव के चरण में थी। एमआईएमबी की रिपोर्ट के अनुसार घटना में एक व्यक्ति द्वारा पीडिता को चोट पहुंचाने की सम्भावना सबसे अधिक है, एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा चोट पहुंचाने की सम्भावना कम है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में विधि विज्ञान विभाग में प्रोफेसर डा. आदर्श कुमार ने अपने बयान में कहा है कि इस प्रकरण में सीबीआई के विवेचक ने प्रकरण से सम्बन्धित पीड़िता के उपचार, पोस्टमार्टम सम्बन्धित दस्तावेज दिखाकर मल्टी इंस्टीट्यूशनल मेडिकल बोर्ड (MIMB) परामर्श किया था, जिसका मैं चेयरमैन था। ये बोर्ड चिकित्सा महानिदेशक, स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के आदेश 02.11.2020 से गठित हुआ था। हमारी संयुक्त MIMB ने इस प्रकरण की पीड़िता से सम्बन्धित समस्त दस्तावेज का परिशीलन व अवलोकन किया एवं समय-समय पर जिन-जिन डाक्टरों ने पीड़िता का इलाज किया था, उनसे उनके द्वारा पीड़िता को दिये गये चिकित्सा के सम्बन्ध में विचार विमर्श किया तथा पीड़िता की मृत्यु उपरान्त जिन डाक्टरों ने उसका शव विच्छेदन किया था, उनसे भी उनकी निष्कर्ष के सम्बन्ध में विचार विमर्श किया था। सदस्यों ने दिनांक 05.11.2020 को जेएनएम अलीगढ़ का दौरा किया तथा वहां डाक्टरों से मुलाकात की तथा प्रकरण के सम्बन्ध में विचार विमर्श किया, जिन डाक्टरों से हमारे दौरे के दौरान हमारी मुलाकात नहीं हो पायी, उनसे हमने फोन पर बातचीत की तथा आवश्यकतानुसार उन्हें बाद में वात के एम्स में मीटिंग के दौरान बुलाया गया। अगले दिन दिनांक 06.11.2020 को हमारी टीम व सीएफएसएल दिल्ली की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा घटनाकम को रिकियेट कर घटनाकम को समझने का प्रयास किया ताकि पीड़िता के शरीर पर पायी गयी चोटों को वैज्ञानिक ढंग से समझने का प्रयास किया। उस दौरान पीड़िता की माँ मौजूद थी और वह हमें घटनाकम के समय अपनी व पीड़िता की स्थिति बता रही थी।
प्रोफेसर डा. आदर्श कुमार ने अपनी प्रतिपरीक्षा में बताया है कि मैंने सीबीआई द्वारा दिये गये बागला हास्पीटल के 3 वीडियो देखे थे। इन वीडियो में पीडिता बोल रही थी। यह सही है कि जेएनएमसी के रिकार्ड के अनुसार दिनांक 14.09.2020 को पीड़िता परीक्षण के समय होश में थी और समय, स्थान व व्यक्ति के बारे में सचेत थी और उसके कान, नाक व मुँह से किसी भी प्रकार का खून का श्राव नहीं था। यह भी सही है कि पीड़िता को उसके पिता द्वारा मात्र गला घोंटने की शिकायत पर भर्ती कराया गया था। मैंने पीडिता की स्त्री रोग विशेषज्ञ की रिपोर्ट भी देखी थी। डा. भूमिका शर्मा की रिपोर्ट भी देखी थी। रिपोर्ट के अनुसार प्राईवेट पार्ट पर कोई भी फ्रेश इंजरी नहीं थी, न ही कोई हिल्ड इंजरी अंकित की है। सेक्सुअल असाल्ट फारेनसिक इग्जामिनेशन रिपोर्ट दिनांक 22.09.2020 में यह अंकित है कि “Patient did not gave any history of sexual assault at the time of admission to the Hospital. She told about incidence first time on 22.09.2020। 22.09.2020”. यह सही है कि अगर यूरेश्ना से पीडिता को घटना के दिन कैथाराईज किया जायेगा तो वेजाईना का बाहरी भाग साफ दिखायी देगा और अगर वहाँ फेश इंजरी होगी तो वह दिखायी देगी।
इस केस में पीडिता की फारेन्सिक इग्जामिनेशन रिपोर्ट एमआईएमबी की टीम ने देखी है। फारेन्सिक रिपोर्ट के अनुसार पीडिता के सीज किये गये किसी भी आर्टिकल पर कोई वीर्य नहीं पाया गया। एमआईएमबी की टीम ने दिनांक 06.11.2020 को दोपहर 12:00 बजे पीड़िता की माँ को विमर्श हेतु बुलाया था और उसने यह बताया कि पीडिता घटना के समय जो कपडे पहने हुये थी वह कपडे पीडिता के शरीर पर पहनाये थे तथा वह कपडे दिनांक 22.09.2020 तक बदले नहीं गये एवं अन्तिम बार उन कपडों को दिनांक 22.09.2020 को ही डाक्टर्स द्वारा जेएनएमसी में लिया गया था।
सीमा पाहूजा ने अपने बयान में कहा है कि सीबीआई द्वारा चन्दपा स्थित मधूसुदन डेयरी पर कार्यरत कर्मचारियों एवं डेयरी प्रबन्धक से पूछताछ की थी और सभी ने यही बताया था कि घटना के दिन अभियुक्त रामू उक्त डेयरी पर काम करने पहुंचा था तथा काम किया था। हमने मधूसुदन डेयरी चन्दपा पर लगे हुये सीसीटीवी कैमरे की डीबीआर भी कब्जे में ली थी तथा विवेचना के दौरान मधूसुदन डेयरी चन्दपा की उपस्थिति पंजिका को कब्जे में लिया था, जिसमें अभियुक्त रामू की उपस्थिति दर्ज थी।
निष्कर्ष: हाथरस कांड में “गैंगरेप के सबूत मिटाने” का आरोप जांच रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं होता। पीड़िता और उसके परिवार ने घटना के करीब 8-9 दिन बाद पहली बार गैंगरेप का आरोप लगाया था जबकि उससे पहले दिए गए बयान, मेडिकल रिकॉर्ड और शुरुआती जांच में दुष्कर्म की बात सामने नहीं आई थी। जांच में यह भी दर्ज है कि घटना के समय पहने गए कपड़े 22 सितंबर 2020 तक बदले नहीं गए थे और उसी दिन डॉक्टरों ने उन्हें कब्जे में लिया। ऐसे में यह साबित नहीं होता कि पुलिस ने सबूत नष्ट कर दिए थे।

