उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में 400 करोड़ की जमीन धोखाधड़ी के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूर्व एडीएम समेत कंपनियों और बैंक अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि यह घोटाला नरेंद्र मोदी और उनके चहेते सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार में हुआ है।
पत्रकार विशाल यादव ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया। इस वीडियो के Thumbanil में लिखा गया, ‘मोदी सरकार की नाक के नीचे सबसे बड़ा घोटाला, मोदी के लाडले सीएम पर गिरी गाज…‘

इस वीडियो में विशाल यादव ने कहा, ‘मोदी सरकार के नाक के नीचे चल रहे हैं बड़े-बड़े घोटाले और आज एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो गया है। दोस्तों, यह सरकार कहती है कि हमने भूमाफियाओं को मिट्टी में मिला दिया है। हमने गुंडों बदमाशों को खत्म कर दिया है। गुंडा राज खत्म कर दिया है। भ्रष्टाचार खत्म कर दिया है। लूटपाट खत्म कर दिया है। यहां तक कि भूमाफियों को भी खत्म कर दिया है। लेकिन दोस्तों सरकार के नाक के नीचे जब बड़े-बड़े घोटाले पकड़े जाते हैं तो यही सरकार शर्मसार हो जाती है। आज मैं आप लोगों को दिखाने जा रहा हूं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज्य में यानी कि उत्तर प्रदेश में इतना बड़ा घोटाला पकड़ा गया है जिस घोटाले को देखकर आप सभी लोग दंग रह जाएंगे। दोस्तों ये घोटाला लगभग 400 करोड़ के आसपास का यहां पर मापा जा रहा है।…’
क्या है हकीकत? पड़ताल में हमे इस सम्बन्ध में मीडिया संस्थान ‘आज तक‘ की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर देहात के भोगनीपुर इलाके में साल 2011 में थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए ग्राम सभा और किसानों की कृषि भूमि आवंटित की गई थी। सात गांवों की 2332 एकड़ जमीन दो कंपनियों- हिमावत पावर और लैंको अनपारा पावर आवंटित की गई थी। समझौते के तहत कंपनियों को तीन साल के भीतर प्लांट तैयार करके बिजली उत्पादन शुरू करना था लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी वहां कोई काम नहीं हुआ, जमीन खाली पड़ी रही। जब जांच की गई तो सामने आया कि कंपनियों ने सरकार की अनुमति लिए बिना इस जमीन को बैंकों के पास गिरवीं रख दिया। इसके जरिए करीब 1500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया।
इसी प्रकरण में दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि यह मामला वर्ष 2011 से जुड़ा हुआ है। शासन की ओर से चपरघटा सहित कृपालपुर, भुण्डा, रसूलपुर और भरतौली समेत आसपास के गांवों की ग्राम समाज एवं निजी काश्तकारों की जमीन थर्मल पावर परियोजना के लिए आवंटित की गई थी। वर्तमान जिलाधिकारी कपिल सिंह के संज्ञान में जब यह मामला आया कि बिना सरकारी अनुमति के इस जमीन को बैंकों में गिरवी रखा गया है, तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। जांच में तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) ओ.के. सिंह की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। प्रशासन का कहना है कि कंपनियों, बैंक अधिकारियों और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। भोगनीपुर तहसीलदार प्रिया सिंह की तहरीर पर थाना मूसानगर में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में संबंधित कंपनियों के साथ-साथ आईडीबीआई बैंक, केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों को भी नामजद किया गया है।

हमे इस मामले में कानपुर देहात के थाना मूसानगर में दर्ज एफआईआर कॉपी भी मिली। यह एफआईआर तहसील भोगनीपुर, जनपद कानपुर देहात की तहसीलदार प्रिया देवी द्वारा दर्ज करवाई गई है। जिसके मुताबिक वर्ष 2010-11 में हिमावत पावर प्रा. लि. और लैंको अनपरा पावर लिमिटेड को थर्मल पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए सरकारी व ग्राम समाज की जमीन लीज पर दी गई थी। कंपनियों ने लीज की शर्तों का उल्लंघन करते हुए बिना राज्य सरकार की अनुमति के जमीन को बैंकों में गिरवी रख दिया।

आरोप है कि फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और IDBI बैंक से लगभग 300-400 करोड़ रुपये का लाभ लिया गया। मामले में तत्कालीन अपर जिलाधिकारी भू-अध्याप्ति जे.के. सिंह, संबंधित बैंक अधिकारियों और कंपनी अधिकारियों पर साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। इसी आधार पर IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
निष्कर्ष: कानपुर देहात जमीन घोटाले में परियोजनाओं और जमीन आवंटन की प्रक्रिया वर्ष 2010-11 में शुरू हुई थी। वर्तमान में योगी सरकार ने मामले में कार्रवाई करते हुए पूर्व अधिकारियों, कंपनियों और बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले में सीएम योगी पर गाज गिरने का दावा भी गलत है।

