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21 Aug 2026, Fri

पीएम मोदी की दिल्ली यूनिवर्सिटी की कॉलेज आईडी कार्ड फर्जी है

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से दिल्ली यूनिवर्सिटी का एक पहचान पत्र वायरल है। कार्ड में उनका नाम, BA (External), वर्ष 1978-79 और गांधीनगर, गुजरात का पता दर्ज है। सोशल मीडिया यूजर्स इसे नरेंद्र मोदी का 1978-79 का दिल्ली यूनिवर्सिटी का पहचान पत्र बताकर शेयर कर रहे हैं।

क्या लिख रहे हैं लोग?

प्रियांशी फॉर रागा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘जब भी BJP IT सेल मोदी को जीनियस दिखाने की कोशिश करती है, तो यह उल्टा उन्हीं पर भारी पड़ता है, वे 1978-79 में बारकोड दिखा रहे हैं।

अरे शुक्लाजी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘1978 में बारकोड क्या था ???’

क्या है हकीकत?

अपनी पड़ताल में हमने वायरल पहचान पत्र में कुछ बातों पर गौर किया। यहाँ यूनिवर्सिटी का स्थापना वर्ष 1958 बताया गया है। पहचान पत्र पर SOL लिखा है, मुहर भी SOL की लगी है। इसके अलावा Authorised Signatory पर नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर हैं।

वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के मुताबिक इसकी स्थापना 1922 में की गयी थी। GNTTV की वेबसाइट पर भी बताया गया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी साल 1922 में स्थापित किया गया था हालांकि, इसका साउथ कैंपस 1973 में ही अस्तित्व में आया था। शुरुआत में डीयू के कुल 3 कॉलेज थे। इन तीन में पहला सेंट स्टीफंस कॉलेज था जो एक मिशनरी पहल के तहत कैम्ब्रिज मिशन टू दिल्ली ने 1881 में स्थापित किया था। दूसरा कॉलेज हिंदू कॉलेज है जो 1899 में स्थापित हुआ था और फिर रामजस कॉलेज, जिसकी स्थापना 14 मई 1917 को की गई थी।

इसी तरह वायरल पहचान पत्र में सबसे बड़ी गलती ‘SCHOOL OF OPEN LEARNING (SOL)’ लिखे होने की है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर बताया गया है कि 1962 में दिल्ली विश्वविद्यालय में School of Correspondence Courses शुरू हुआ था, जिसका 1968 में नाम School of Correspondence Courses and Continuing Education (SOCCCE) किया गया। 1978 में मोदी ने B.A. की परीक्षा पास की थी, जबकि ‘School of Open Learning (SOL)’ नाम 2004 में अपनाया गया। इसलिए 1978-79 का बताकर बनाए गए इस कार्ड पर ‘SOL’ लिखा होना ऐतिहासिक रूप से असंभव है।

इस पहचान पत्र के नीचे हस्ताक्षर के लिए “Authorised Signatory” लिखा है लेकिन इस जगह पर नरेंद्र मोदी के नाम का हस्ताक्षर दिखाई दे रहा है। यानी कार्ड पर छात्र के रूप में दर्ज व्यक्ति और संस्थान की ओर से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के लिए तय जगह, दोनों पर एक ही व्यक्ति का हस्ताक्षर दिखाया गया है। किसी छात्र के पहचान पत्र पर “Authorised Signatory” के स्थान पर उसी छात्र का हस्ताक्षर नहीं होते हैं।

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