सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से दिल्ली यूनिवर्सिटी का एक पहचान पत्र वायरल है। कार्ड में उनका नाम, BA (External), वर्ष 1978-79 और गांधीनगर, गुजरात का पता दर्ज है। सोशल मीडिया यूजर्स इसे नरेंद्र मोदी का 1978-79 का दिल्ली यूनिवर्सिटी का पहचान पत्र बताकर शेयर कर रहे हैं।
क्या लिख रहे हैं लोग?
प्रियांशी फॉर रागा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘जब भी BJP IT सेल मोदी को जीनियस दिखाने की कोशिश करती है, तो यह उल्टा उन्हीं पर भारी पड़ता है, वे 1978-79 में बारकोड दिखा रहे हैं।
Whenever BJP IT cell try to portray Modi as genius, it backfires to him only 🤣🤣🤣
— ❤️ Priyanshi for RaGa❤️ Die hard Messi Fan (@RaGakiDeewani) August 19, 2026
They are showing barcode in 1978-79😂😂 pic.twitter.com/lnat3dH0pS
अरे शुक्लाजी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘1978 में बारकोड क्या था ???’
1978 me barcode tha ??? 😭😭 pic.twitter.com/6oA9Mo6NuF
— aree_shuklajii (@th_anonymouse) August 19, 2026
क्या है हकीकत?
अपनी पड़ताल में हमने वायरल पहचान पत्र में कुछ बातों पर गौर किया। यहाँ यूनिवर्सिटी का स्थापना वर्ष 1958 बताया गया है। पहचान पत्र पर SOL लिखा है, मुहर भी SOL की लगी है। इसके अलावा Authorised Signatory पर नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर हैं।

वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के मुताबिक इसकी स्थापना 1922 में की गयी थी। GNTTV की वेबसाइट पर भी बताया गया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी साल 1922 में स्थापित किया गया था हालांकि, इसका साउथ कैंपस 1973 में ही अस्तित्व में आया था। शुरुआत में डीयू के कुल 3 कॉलेज थे। इन तीन में पहला सेंट स्टीफंस कॉलेज था जो एक मिशनरी पहल के तहत कैम्ब्रिज मिशन टू दिल्ली ने 1881 में स्थापित किया था। दूसरा कॉलेज हिंदू कॉलेज है जो 1899 में स्थापित हुआ था और फिर रामजस कॉलेज, जिसकी स्थापना 14 मई 1917 को की गई थी।
इसी तरह वायरल पहचान पत्र में सबसे बड़ी गलती ‘SCHOOL OF OPEN LEARNING (SOL)’ लिखे होने की है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर बताया गया है कि 1962 में दिल्ली विश्वविद्यालय में School of Correspondence Courses शुरू हुआ था, जिसका 1968 में नाम School of Correspondence Courses and Continuing Education (SOCCCE) किया गया। 1978 में मोदी ने B.A. की परीक्षा पास की थी, जबकि ‘School of Open Learning (SOL)’ नाम 2004 में अपनाया गया। इसलिए 1978-79 का बताकर बनाए गए इस कार्ड पर ‘SOL’ लिखा होना ऐतिहासिक रूप से असंभव है।
इस पहचान पत्र के नीचे हस्ताक्षर के लिए “Authorised Signatory” लिखा है लेकिन इस जगह पर नरेंद्र मोदी के नाम का हस्ताक्षर दिखाई दे रहा है। यानी कार्ड पर छात्र के रूप में दर्ज व्यक्ति और संस्थान की ओर से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के लिए तय जगह, दोनों पर एक ही व्यक्ति का हस्ताक्षर दिखाया गया है। किसी छात्र के पहचान पत्र पर “Authorised Signatory” के स्थान पर उसी छात्र का हस्ताक्षर नहीं होते हैं।
| दावा | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कॉलेज आईडी कार्ड है। |
| हकीकत | वायरल दिल्ली यूनिवर्सिटी का पहचान पत्र फर्जी है। |

