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3 Jun 2026, Wed

वाराणसी में ढहाई गई मजार और मस्जिद रेलवे की जमीन पर बनी थी

वाराणसी के राजघाट स्थित काशी रेलवे स्टेशन के पास बनी एक मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। इस प्रकरण में सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि राज्य की योगी सरकार ने अपनी मनमानी करते हुए घटना को अंजाम दिया। 

सूर्या समाजवादी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘कल रात को वाराणसी मे 200 साल पुरानी अजगैब शहीद मस्जिद को ढहा दिया जब से ये नफ़रती सत्ता में आए है रोज़ाना केवल नफ़रत फैलाने का ही काम कर रहे है   2027 में इन नफरतियों को जनता प्रदेश से खदेड़ देगी’  

एम एच अंसारी ने लिखा, ‘कल रात को वाराणसी मे 200 साल पुरानी अजगैब शहीद मस्जिद को शहीद दिया’

क्या है हकीकत? पड़ताल में हमे इस सम्बन्ध में दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक भदऊ चुंगी स्थित किला कोहना इलाके में अजगैब शहीद की मस्जिद और कब्रिस्तान स्थित है। प्रशासन का कहना है कि यह रेलवे की पुरानी जमीन है, जिस पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा करके पहले मजार बनाई। बाद में मस्जिद और कब्रिस्तान का निर्माण किया गया। साल 2024 में काशी मॉडल रेलवे स्टेशन का प्रोजेक्ट आया। इसके बाद जमीन की पैमाइश कराई गई, जिसमें अवैध कब्जे का पता चला। रेलवे ने मस्जिद के मुतवल्ली से जमीन खाली करने के लिए कहा। हालांकि, वह कोर्ट पहुंच गए। हाल ही में मुतवल्ली केस हार गए। इसके बाद रेलवे ने जमीन खाली करने के लिए 3 बार नोटिस जारी किया, लेकिन जमीन खाली नहीं की गई। इसके बाद कार्रवाई की गई।

एनडीटीवी की रिपोर्ट में बताया गया है कि ​साल 2024 में जब काशी मॉडल रेलवे स्टेशन की योजना लाई गई तो जमीन की पैमाइश की गई। तब अवैध कब्जे का पता चला, जिसके बाद रेलवे ने इसे खाली करने के लिए कहा, मामला कोर्ट में भी पहुंचा, जहां से हाल ही में मजार पक्ष के लोग केस हार गए। ​इसके बाद रेलवे की ओर से जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया गया, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। आज प्रशासन द्वारा मजार और मस्जिद को तोड़ने की कार्रवाई की गई है।

इस सम्बन्ध में एनबीटी की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि मजार और मस्जिद पर बुलडोजर एक्‍शन के दौरान सैकड़ों पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे। इससे पहले एसीपी शिवहरि मीणा ने अफसरों के साथ मौके पर पहुंचकर मस्जिद का जायजा लिया। मस्जिद और मजार की चारों तरफ से बेरिकेडिंग कराई गई। रात में ही मस्जिद के मलबे को गाडि़यों में भरकर हटा दिया गया। यह मामला दो सालों से कोर्ट में था। हाल ही में मजार पक्ष के लोग केस हार गए थे। इसके बाद रेलवे की ओर से उनको जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया गया, लेकिन उन्‍होंने ऐसा नहीं किया

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