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21 Jun 2026, Sun

फायरिंग का यह वीडियो बिहार में भरत तिवारी की मौत को लेकर विरोध प्रदर्शन का नहीं है

बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में 17 जून 2026 को कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत तिवारी की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल है, जिसमे लोगों की भीड़ फायरिंग करती हुई नजर आ रही है। दावा है कि भरत तिवारी की मौत के बाद लोग आक्रोशित होकर फायरिंग कर रहे हैं।

क्या लिख रहे हैं लोग?

Nation 360 ने लिखा, ‘बीजेपी के खिलाफ गोली-बारूद लेकर सड़को पर उतरे लोग’

नीरज कुमार ने इन्स्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, ‘भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद स्वर्ण समाज (सवर्ण समाज) और समर्थकों का आक्रोश फूट पड़ा। न्याय की मांग और पुलिस के खिलाफ गुस्से में लोगों ने जमकर हवाई फायरिंग (गोलियां) की.’

Nation Voice ने लिखा, ‘बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत के बाद भारी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। जवनिया गांव के कटाव और बाढ़ का मुद्दा उठाने वाले भरत तिवारी के समर्थन और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ लोगों ने आरा-बक्सर हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया’

क्या है हकीकत?

पड़ताल में हमने वायरल वीडियो के अलग अलग स्क्रीनशॉट को गूगल रिवर्स सर्च किया तो यह वीडियो हमे ‘Reddit‘ पर मिला। इस वीडियो को 4 महीने पहले 5 मार्च 2026 को ‘बारूद की होली-मेनार’ कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया था।

हमने इस कैप्शन के कीवर्ड्स को गूगल सर्च किया तो हमे इससे सम्बंधित दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के उदयपुर से 45 किलोमीटर दूर उदयपुर-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर स्थित मेनार गांव में 4 मार्च की रात बारूद की होली खेली गयी। करीब 451 साल पहले मुगल चौकी ध्वस्त करने की खुशी में मेनारिया ब्राह्मण समाज बारूद की होली खेलता है। हर साल होलिका दहन के 48 घंटे बाद यानि तीसरी रात (जमरा बीज) को यह आयोजन होता है।

रिपोर्ट में आगे बताया है कि मेवाड़ में महाराणा अमर सिंह के साम्राज्य के दौरान जगह-जगह मुगलों की छावनियां (सेना की टुकड़ियां) बनी हुई थीं। मेनार गांव के पूर्वी छोर पर भी मुगल छावनी थी। छावनी के आतंक से लोग परेशान थे। मेनारिया ब्राह्मणों की भी परेशानियां बढ़ने लगी थीं। मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर जीत का समाचार मिला तो गांव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर जुटे और छावनी पर हमले की रणनीति बनाई। इसके बाद हमला कर मुगल छावनी को ध्वस्त कर दिया।

अमर उजाला की रिपोर्ट में भी बताया गया है, ‘महाराणा प्रताप के पिताजी उदय सिंह के समय मेनार गांव से आगे मुगलों की एक चौकी हुआ करती थी। मुगलों की इस चौकी से मेवाड़ साम्राज्य की सुरक्षा को खतरा था। मेवाड़ की रक्षा करने के लिए मेनारिया ब्राह्मण समाज के लोग रणबांकुरे बन कर मुगलों की चौकी पर धावा बोला और उसे पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। इस हमले में मेवाड़ की रक्षा में समाज के कुछ लोग भी शहीद हुए। उसके बाद से ही समाज के लोग मुगल चौकी पर अपनी जीत के जश्न को इसी आतिशी अंदाज के साथ मना रहे हैं। इस जश्न में उस हमले का का चित्रण दर्शाया जाता है।’

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