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26 May 2026, Tue

यह वीडियो भारत में ईसाई महिला को फांसी देने का नहीं है

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें कुछ लोग रस्सी खींचते हुए एक महिला को पेड़ से लटकाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि भारत में महिलाओं के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की वकालत करने वाली एक ईसाई महिला प्रचारक को हिंदुत्ववादी समूह ने चर्च के बाहर पेड़ से लटका दिया।

Dr Antidote ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘कहा जा रहा है कि भारत में एक ईसाई उपदेशक को दिन-दहाड़े फाँसी दे दी गई। भारत में कोई धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है। भारत में भीड़तंत्र अपने चरम पर है!’

Jvnior ने लिखा, ‘सोचो अगर ये मुसलमान होते, तो दुनिया इस पर टूट पड़ती। लेकिन क्योंकि यह भारत में हो रहा है? चुप्पी।’

Halal Nation ने लिखा, सुभानअल्लाह, इन लोगों को इस्लाम की ज़रूरत है। यह बहुत बड़ा अन्याय और बर्बरता है।

सपना सिंह ने लिखा, ‘सरे आम लड़की को फांसी पर लटका दिया है! एक लड़का भगवा गमछा डाले हुए वीडियो बना रहा है, और लाइव फांसी दिखा रहा है! कैसी है कानून वयवस्था? इन लोगों के सामने कानून कुछ भी नहीं है क्या? लड़की को फांसी पर लटका के मार दिया और फिर उतार कर ले भी गए! महिला सम्मान की बात करने वाले यह क्या हो रहा है? यह सब कानून के दोषी हैं! इन सब पर कार्यवाही होनी चाहिए!’

क्या है हकीकत? अपनी पड़ताल के दौरान हमने वायरल वीडियो के अलग अलग स्क्रीनशॉट्स को गूगल सर्च किया। इस दौरान यह वीडियो हमे इंस्टाग्राम पर Chinivas Mahato नाम की आईडी पर मिला। इस वीडियो को ‘Pundru mela’ कैप्शन के साथ 16 अप्रैल 2026 को पोस्ट किया गया था। वहीं वीडियो पर ‘CHARAK PUJA PUNDRU’ टेक्स्ट भी देखा जा सकता है।

पड़ताल में हमे फांसी के द्रश्य में नजर आ रहा मंदिर एक इन्स्टाग्राम यूजर ‘चरन’ की प्रोफाइल पर मिला। हमने उनसे सम्पर्क किया तो चरन ने बताया, “यह वीडियो झारखंड के बोकारो जिले में पुंडरु गाँव का है। यहाँ अप्रैल माह में चड़क महोत्सव मनाया जाता है। यह भगवान शिव के सम्मान में हिंदू लोक उत्सव है।” चरन ने आगे बताया, ”वीडियो में फांसी का द्रश्य असली नहीं है, यह एक प्रतीकात्मक फांसी है।”

इसके बाद हमे गूगल मैप की मदद ली तो वायरल वीडियो पर नजर आ रहा मंदिर Pundru गाँव में मिला।


इसके अलावा हमें Nayak Vlogs नाम के यूट्यूब चैनल पर ‘Pundru Charak Puja 2026,,,’ शीर्षक से एक वीडियो मिला। इसमें चड़क पूजा के वही दृश्य दिखाई देते हैं, जो वायरल वीडियो से मेल खाते हैं।

इसके अलावा हमें प्रभात खबर की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें बताया गया है कि चड़क झारखंड और आसपास के इलाकों में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक हिंदू लोक उत्सव है। रिपोर्ट के मुताबिक इस उत्सव में भगवान शिव की पूजा की जाती है। चड़क पूजा के दौरान अजिबो नजारा देखने को मिलती है। इस दौरान कई भोक्ता हैरतंगेज करतब दिखाते है। चड़क पूजा के दौरान भगवान शिव से मांगी गयी मन्नत पूरी होने की खुशी में भोक्ता भगवान शिव की आराधना कर हठ भक्ति को प्रदर्शित करते है। सरायकेला के भुरकुली, खरसावां के चिलकु, कुचाई के अरुवां समेत कई गांवों में हर वर्ष हठ भक्ति की इस परंपरा को निभाते हुए देखा जाता है। कोई अपने अपनी पीठ की चमड़ी में छेद करा कर बैल गाडी खींच लेता है तो अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी में 25 फीट ऊंची एक बांस के सहारे झूल जाता है। ढ़ोल-नगाडों की थाप पर जलते आग के शोलों पर चलते दर्जनों भोक्ताओं को भी देखा जा सकता है। कई भोक्ता तो बबूल, बेर, बेल के कांटेदार टहनियों को फूलों की सेज समझ कर लेट जाते है। कई भोक्ता लकड़ी के पटरा पर गाड़े गये नूकीला कांटी पर सोकर अपने आराध्य देव से किया हुआ वायदा पूरा करते है।

इसके अलावा हमें Zee Bihar Jharkhand की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चड़क पूजा झारखंड में मनाया जाने वाला भगवान शिव से जुड़ा एक पारंपरिक लोक पर्व है। इस उत्सव में श्रद्धालु शरीर में लोहे की कीलें चुभाकर और अन्य कठिन धार्मिक अनुष्ठान कर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

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