सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल है। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी शव को ले जाते हुए लोगो को रोक रहे हैं, दावा किया जा रहा है कि वीडियो मध्यप्रदेश का है जहां एक दलित की चिता सिर्फ इसलिए रोक दी गई जिससे उसका धुआं ब्राह्मणों के श्मशान तक ना पहुँच जाए।
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी से समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने एक्स पर वीडियो साझा कर लिखा कि, ‘क्या अब धुएँ की भी जाति होगी? मध्य प्रदेश में दलित की चिता सिर्फ इसीलिए रोक दी गयी क्योंकि उसका धुआं ब्राह्मणों के श्मशान तक जा रहा था। जिंदा रहते भेदभाव, मरने के बाद भी अपमान। ये इंसानियत नहीं, जातिवाद की पराकाष्ठा है।’

आरजेडी कार्यकर्त्ता पुष्पराज यादव ने लिखा, ‘मध्यप्रदेश की घटना – जहां एक दलित व्यक्ति की चिता को सिर्फ़ इसलिए जलने से रोक दिया गया क्योंकि उसका धुआं ब्राह्मणों के श्मशान तक जाता है। ये वही लोग है जो मस्जिदों के सामने मुजरा करते दिखाई देते है।’
मध्य प्रदेश की घटना — जहां एक दलित व्यक्ति की चिता को सिर्फ इसलिए जलने से रोक दिया गया क्योंकि उसका धुआं ब्राह्मणों के श्मशान तक जाता है।
— Pushpraj Yadav (@pushprajyadav97) May 24, 2026
ये वही लोग है जो मस्जिदों के सामने मुजरा करते दिखाई देते है….. pic.twitter.com/FPfwY6yzZE
वॉइस ऑफ बहुजन ने ट्वीट किया, ‘मरने के बाद भी जाति? मध्य प्रदेश में एक दलित भाई की चिता को जलने से रोक दिया गया।कारण? उनका धुआँ “ब्राह्मणों के श्मशान” तक पहुँच जाएगा। मृत्यु के बाद भी इंसान को इंसान नहीं माना गया। चिता पर भी जाति का पहरा,ये घटना शर्मनाक है’

कांग्रेस कार्यकर्ता रितु चौधरी ने वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘क्या आपको पता है धुएँ कि भी जाति होती है। मध्य प्रदेश में एक दलित की चिता जलने से केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं “ब्राह्मणों के श्मशान” तक चला जाता…उस पर भी शर्मनाक ये कि पुलिस भी दलित परिवार पर ही दवाब डाल रही है क्यूं की पुलिस प्रशासन खुद जातिवाद से अंदर तक सड़ा हुआ हैं।शर्म आनी चाहिए ऐसे समाज पर, जहां मौत के बाद भी दलित को सम्मान नहीं मिलता।ज़िंदा था तब दलित होने नाम पर भेदभाव, नफ़रत, ज़लालत, छुआछूत, और जब मर गया तो उसकी चिता का धुंआ भी “अछूत” हो गया जो ब्राह्मणों के शमशान तक नहीं पहुंचना चाहिए वरना बेचारे मरे हुए ब्राह्मण भी अशुद्ध हो जाएंगे।ये सिर्फ भेदभाव नहीं, ये इंसानियत की लाश पर खड़ा ब्राह्मणवाद है।जिस समाज में मृतक की चिता का धुआं भी जाति देखकर स्वीकार किया जाए, उस समाज को सभ्य कहलाने का कोई अधिकार नहीं।
क्या आपको पता है धुएँ कि भी जाति होती है 👇
— Ritu Choudhary (@RituChoudhryINC) May 24, 2026
मध्य प्रदेश में एक दलित की चिता जलने से केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं “ब्राह्मणों के श्मशान” तक चला जाता…
उस पर भी शर्मनाक ये कि पुलिस भी दलित परिवार पर ही दवाब डाल रही है क्यूं की पुलिस प्रशासन खुद जातिवाद से अंदर तक सड़ा… pic.twitter.com/8oDF2LFqFE
इसके अलावाVøɪɗ Ƈσѕмɪc Ƈσммєηтɾу, Dr Kaalika, Jayant Dhote, Pushpendra Saroj, Mukesh Kumar ने भी यही दावा किया है।
क्या है हकीकत? पड़ताल हमने वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट को गूगल रिवर्स सर्च किया तो यह वीडियो हमे एक मीडिया संस्थान भारत समाचार के एक्स अकाउंट पर मिला। इस वीडियो को 15 दिसम्बर 2025 को पोस्ट किया था, पोस्ट के मुताबिक यह घटना अमेठी में की है। साथ ही लिखा है कि परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से मना किया। उन्होंने हत्यारोपी की गिरफ्तारी की मांग की।
अमेठी : श्मशान के केयरटेकर की हत्या का मामला
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) December 15, 2025
➡परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से किया मना
➡परिजनों की मांग- पहले हत्यारे गिरफ्तार हों
➡रिक्शा पर रखकर शव लेकर जाम लगाने निकले
➡रास्ते में पुलिस और ग्रामीणों में हुई नोक-झोंक
➡शव कंधे पर लादकर रोड जाम करने निकले
➡जगदीशपुर… pic.twitter.com/spAbbrWlnX
हमने इन कीवर्ड्स की मदद से गूगल सर्च किया तो 15 दिसंबर 2025 को प्रकाशित दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना अमेठी में जगदीशपुर थाना क्षेत्र के हारीमऊ गांव की है। गूंगेमऊ गांव निवासी मक्खन सिंह हारीमऊ में निर्माणाधीन अंत्येष्टि स्थल पर केयरटेकर के रूप में कार्यरत थे। अज्ञात बदमाशों ने ईंटों से कूंचकर उनकी हत्या कर दी थी। रविवार सुबह अंत्येष्टि स्थल के पास उनका शव मिला, जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और परिजनों की तहरीर पर अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी जब पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी तो परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। वे ई-रिक्शे से शव को गांव की मुख्य सड़क पर ले आए और जाम लगा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस के अलावा करीब आधा दर्जन थानों की पुलिस मौके पर पहुंची है। पुलिस ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास कर रही है लेकिन प्रदर्शनकारी हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं।
वहीं 16 दिसम्बर 2025 को प्रकाशित हिंदुस्तान, दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने मक्खन सिंह की हत्या के मामले में शिवलाल पुत्र नीमर तथा धर्मराज उर्फ डडू पुत्र दातादीन उर्फ दतई नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपी फरार चल है।
आरोपियों ने बताया कि शनिवार की रात वह लोग मक्खन सिंह के साथ निर्माणाधीन अन्त्येष्टि स्थल पर अलाव जलाकर ताप रहे थे। इसी दौरान मक्खन ने शिवलाल के बेटे दिलीप को गाली दे दी और एक डंडा मार दिया। जिस पर दिलीप ने पास में पड़ी हथौड़ी से मक्खन के चेहरे व सिर पर दो-तीन वार कर दिया। वहीं धर्मराज ने भी पास में पड़ी ईंट से तथा शिव लाल ने लकड़ी की फंटी से मक्खन को मारा था। जिसके बाद एक्सीडेंट दिखाने के लिये मक्खन के शव को साइकिल से ले जाकर कुछ दूरी पर डाल कर ऊपर से साइकिल गिरा दिया था।
इसी वीडियो को जातिगत दावों के साथ पहले भी वायरल किया जा चुका है तब हमने इस पर रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी। साथ ही हमने गांव के प्रधान अभिषेक विक्रम सिंह से भी संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि परिजन शव को लेकर गांव से बाहर प्रदर्शन के लिए जा रहे थे तब पुलिस उन्हें रोक रही थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि इस घटना में जातिगत विवाद नहीं है। मृतक दलित नहीं, ठाकुर जाति से था।
ऊँची जाति के शमशान में दलित के शव को जलाने से रोकने का दावा सच नहीं है
— Fact Myths (@TheFactMyths) December 18, 2025
यहाँ पढ़ें: https://t.co/XJCmIG8HTh pic.twitter.com/ypiGRnWqGS
निष्कर्ष: हमारी पड़ताल से यह स्पष्ट है कि यह वीडियो हत्या के खुलासे को लेकर शव के साथ विरोध प्रदर्शन का है। घटना में किसी तरह का जातिगत एंगल नहीं है। साथ ही यह वीडियो मध्यप्रदेश नहीं, यूपी का है।

