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23 Jun 2026, Tue

बिहार के भरत भूषण तिवारी की गिरफ्तारी, अंतिम यात्रा, विरोध प्रदर्शन के नाम पर पुराने वीडियो वायरल हैं

बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस ने 17 जून को भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर किया था। इस एनकाउंटर पर अब सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया में कई वीडियो वायरल हैं, इन वीडियो को भरत तिवारी से जोड़कर शेयर किया जा रहा है।

क्या लिख रहे हैं लोग?

पहला वीडियो: रमेश तिवारी ने एक्स पर एक वीडियो शेयर कर लिखा, ‘भारत तिवारी की अंतिम यात्रा, जीते-जी वे लोगों के लिए लड़ते रहे, लेकिन उन लड़ाइयों को उन्होंने अक्सर अकेले ही लड़ा। मगर उनके निधन के बाद, बिना किसी बुलावे के बड़ी संख्या में लोग खुद-ब-खुद जुट गए। किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली बातें लिखने के बजाय, इस दृश्य को देखना और एक साधारण सच को समझना बेहतर है—जब जनता के लिए खड़ा होने वाला कोई सच्चा और ईमानदार इंसान इस दुनिया से जाता है, तो भीड़ को बुलाना नहीं पड़ता, वह अपने आप चली आती है।’

पुष्पराज शर्मा ने पोस्ट कर लिखा,’श्मशान घाट की भीड़ बता देती है कि इंसान ने क्या कमाया। भरत तिवारी की हत्या” हुई है वो भी भ्रष्ट नेताओं के इशारे पर। जितनी समाज सेवा भाई ने की उतनी इन नेताओं ने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं की होगी।’

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लिखा, ‘भाजपा जिसे मानसिक विच्छिप्त पागल गुंडा राष्ट्र द्रोही साबित करने में दिन रात एक की हुई है उसके लिए – आम जनों का प्यार देखिए। उसके अंतिम दर्शन को स्वतः जुटी ये जनसैलाब देखिए।’

दूसरा वीडियो: एक यूजर पुनीत ने इन्स्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर लिखा, ‘वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि उस समय गोली नहीं मारी गई थी। इससे घटना को लेकर कई गंभीर सवाल उठते हैं और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। ये भ्रष्ट और घूसखोर पुलिसकर्मी सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।’

तीसरा वीडियो: मशाल जुलूस का एक वीडियो इन्स्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए अभय सिंह ने लिखा, ‘Justice for Bharat Tiwari’

चौथा वीडियो: इन्स्टाग्राम पर नीरज कुमार ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, ‘भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद स्वर्ण समाज (सवर्ण समाज) और समर्थकों का आक्रोश फूट पड़ा। न्याय की मांग और पुलिस के खिलाफ गुस्से में लोगों ने जमकर हवाई फायरिंग (गोलियां) की.’

नेशन मुस्लिम ने एक्स पर लिखा, ‘भरत तिवारी का इन्काउन्टर हुआ तो बिहार के लोगों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया!’

पांचवा वीडियो: एक फेसबुक यूजर छोटा पीके ने वीडियो शेयर कर लिखा, ‘भरत तिवारी की अंतिम यात्रा में जुटी ये भीड़ ही बता रही है कि उसका एनकाउंटर लोगों को कितना गलत लगा’

अंकित रावल ने लिखा, ‘भरत तिवारी की अंतिम यात्रा में जुटी ये भीड़ ही बता रही है कि उसका एनकाउंटर लोगों को कितना गलत लगा…’

क्या है हकीकत?

पहला वीडियो: पड़ताल में यह वीडियो हमे इन्स्टाग्राम पर ‘japala_palamu’ के अकाउंट पर मिला। इस वीडियो को 4 जून को पोस्ट किया गया था। यहाँ एक बात स्पष्ट है कि यह वीडियो भरत तिवारी की मौत से पहले का है। भरत की मौत 17 जून को हुई थी।

इसके बाद हमे ‘न्यूज 11 भारत’ के यूट्यूब चैनल पर एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में इसी वायरल वीडियो से मिलते जुलते द्रश्य हैं। यहाँ बताया गया है कि झारखंड के पलामू में एक गहरे गड्ढे में लवकुश नाम का युवक डूब गया है। पुलिस गोताखोरों की मदद से उसको तलाश रही है।

हम इन कीवर्ड्स की मदद से गूगल सर्च किया तो हमे दैनिक जागरण की वेबसाइट पर 7 जून 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड के पलामू में हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के दमदमी खनन क्षेत्र में बने जलभरावयुक्त गहरे गड्ढे में 24 वर्षीय युवक लवकुश कुमार की मौत हो गई। आरोप है कि खनन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का बिलकुल भी ध्यान नहीं रखा गया न तो घेराबंदी थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। प्रशासनिक जांच के बाद माइंस संचालक समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

दूसरा वीडियो: पड़ताल में हमे यह वीडियो हमे इन्स्टाग्राम पर एक यूजर ‘पंडित शिवम मिश्रा‘ के अकाउंट पर मिला, उन्होंने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, ‘महाराजगंज के मदनपुरा गौ सदन में गायों की मौत की खबर के बाद माहौल गरमा गया। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस व प्रशासन भी मौके पर मौजूद रहा……।’

हमने जब इस सम्बन्ध में गूगल सर्च किया तो अमर उजाला की वेबसाइट पर 21 जून 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट मिली, रिपोर्ट के अनुसार महाराजगंज के मदनपुरा गो-आश्रय स्थल में दो गायों के मृत मिलने पर गो रक्षक दल और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया।कार्यकर्ताओं ने गायों की मौत के लिए लापरवाही और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराते हुए जांच व कार्रवाई की मांग की। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के दौरान जेसीबी के इस्तेमाल का भी विरोध किया गया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने स्थिति को शांत कराया। प्रशासन के अनुसार आश्रय स्थल से गायों को दूसरे गोसदन में शिफ्ट किया जा रहा था और मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा।

तीसरा वीडियो: पड़ताल में यह वीडियो हमे ‘विस्तार न्यूज’ के फेसबुक पेज पर मिला। यह वीडियो 14 अगस्त 2025 का है जिसके मुताबिक छत्तीसगढ़ के रायपुर में कान्ग्रेस ने वोट चोरी के आरोप में मशाल जुलूस निकाला था।

चौथा वीडियो: पड़ताल में यह वीडियो हमे ‘Reddit‘ पर मिला। इस वीडियो को 4 महीने पहले 5 मार्च 2026 को ‘बारूद की होली-मेनार’ कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया था।

हमने इस कैप्शन के कीवर्ड्स को गूगल सर्च किया तो हमे इससे सम्बंधित दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के उदयपुर से 45 किलोमीटर दूर उदयपुर-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर स्थित मेनार गांव में 4 मार्च की रात बारूद की होली खेली गयी। करीब 451 साल पहले मुगल चौकी ध्वस्त करने की खुशी में मेनारिया ब्राह्मण समाज बारूद की होली खेलता है। हर साल होलिका दहन के 48 घंटे बाद यानि तीसरी रात (जमरा बीज) को यह आयोजन होता है।

रिपोर्ट में आगे बताया है कि मेवाड़ में महाराणा अमर सिंह के साम्राज्य के दौरान जगह-जगह मुगलों की छावनियां (सेना की टुकड़ियां) बनी हुई थीं। मेनार गांव के पूर्वी छोर पर भी मुगल छावनी थी। छावनी के आतंक से लोग परेशान थे। मेनारिया ब्राह्मणों की भी परेशानियां बढ़ने लगी थीं। मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर जीत का समाचार मिला तो गांव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर जुटे और छावनी पर हमले की रणनीति बनाई। इसके बाद हमला कर मुगल छावनी को ध्वस्त कर दिया।

पांचवा वीडियो: हमारी पड़ताल में यह वीडियो हमें एक इन्स्टाग्राम यूजर ‘nimaj_vala83’ के हैंडल पर मिला। इसे 10 मार्च 2026 को अपलोड किया गया था। जबकि भरत का एनकाउंटर 17 जून 2026 को हुआ था। इससे यह साफ है कि वायरल वीडियो का भरत के अंतिम संस्कार से कोई संबंध नहीं है।

इस इन्स्टाग्राम अकाउंट पर संपर्क करने से हमारी बात हनुमान गहलोत से हुई। उन्होंने बताया, ”ये वीडियो राजस्थान के पाली जिले के निमाज कस्बे का है। बीते माह महीने में स्थानीय पत्रकार गोविंद सेन की हृदय गति रुक जाने की वजह से मौत हो गयी थी। वायरल वीडियो उनकी अंतिम यात्रा का है। गोविंद सेन क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाते थे इसीलिए लोगों का उनसे ख़ासा लगाव था।” इस सम्बन्ध में लोकमत भारत ने भी एक रिपोर्ट प्रकाशित की है।

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