सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बताकर एक मार्कशीट की तस्वीर वायरल हो रही है। इसमें छात्र का नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ लिखा है और दस्तावेज के अनुसार उन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित माध्यमिक विद्यालय से वर्ष 1967-68 में कक्षा 10वीं की परीक्षा पास की थी। तस्वीर में उनके जन्म की तारीख, विषयवार अंक और कुल 421 अंक भी दर्ज हैं। दावा किया जा रहा है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असली हाईस्कूल मार्कशीट है।
क्या लिख रहे हैं लोग?
बिट्टू शर्मा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘1968 में, उन्हें इंग्लिश में 65% मार्क्स मिले थे। लेकिन टेलीप्रॉम्प्टर के बिना वे आम इंग्लिश भी नहीं बोल पाते। क्या यह मुमकिन है??’+

क्या है हकीकत?
वायरल मार्कशीट की जांच करने पर इसमें कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं। सबसे पहली और स्पष्ट गलती मार्कशीट में दर्ज विषयों और पूर्णांकों को लेकर है। दस्तावेज में छह विषय हिंदी, गुजराती, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान दिखाए गए हैं और प्रत्येक विषय के पूर्णांक 100 दर्ज हैं। ऐसे में सभी छह विषयों को मिलाकर कुल पूर्णांक 600 होने चाहिए। हालांकि, मार्कशीट में ‘कुल योग’ के सामने पूर्णांक 500 लिखा गया है।

वायरल दस्तावेज में विद्यालय का नाम ‘माध्यमिक विद्यालय, वडनगर’ लिखा हुआ है। वहीं, अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडनगर स्थित ‘महाराज श्री भगवताचार्य नारायणाचार्य हाईस्कूल’ में पढ़ाई की थी। इससे भी वायरल मार्कशीट पर दर्ज विद्यालय के नाम भी गलत है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्कूली शिक्षा की अवधि भी वायरल मार्कशीट से मेल नहीं खाती। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में उनके स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य के हवाले से बताया गया है कि नरेंद्र मोदी ने इस स्कूल में 1963 से 1967 तक पढ़ाई की थी। जबकि वायरल मार्कशीट में कक्षा 10वीं के सत्र को 1967-68 बताया गया है, नीचे 15 मार्च 1968 की तारीख दर्ज है।
| दावा | धानमंत्री नरेंद्र मोदी की 10वीं की मार्कशीट बताकर वायरल हो रही यह तस्वीर असली है और उन्होंने वर्ष 1967-68 में वडनगर के ‘माध्यमिक विद्यालय’ से 10वीं की परीक्षा पास की थी। |
| निष्कर्ष | मार्कशीट में दर्ज कुल पूर्णांक, विद्यालय का नाम और पढ़ाई की अवधि तीनों ही महत्वपूर्ण बिंदुओं पर उपलब्ध जानकारी से मेल नहीं खाते। इन विसंगतियों के आधार पर वायरल दस्तावेज की प्रामाणिकता संदिग्ध नहीं, बल्कि इसके फर्जी होने के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। |

