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31 May 2026, Sun

क्या यूपी में जून माह से 10 प्रतिशत बिजली महंगी हो जाएगी? 

बीते दिनों से सोशल मीडिया समेत मैंनस्ट्रीम मीडिया में भी यह खबर चर्चा में है कि उत्तर प्रदेश में बिजली 10 प्रतिशत महंगी हो गयी है। दावा है कि प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं का बिल जून माह से 10 फीसदी अधिक आएगा।

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘बड़ी ख़बर-  यूपी में 24 घंटे वाले ‘दावे’ की बिजली पाने वालों के लिए एक और सौग़ात!  बिजली बिल में 10% की बढ़ोतरी, जून से फ्यूल सरचार्ज के साथ आएगा बिल. भारी कटौती और किल्लत के बीच बिजली दरों में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं को झटका. UP पावर कॉरपोरेशन ने बिजली महंगी करने का फैसला किया। अपने अपने मोहल्ले के ट्रांसफ़ॉर्मर की दिशा में मुँह कीजिये और ज़ोर से बोलिए- बटेंगे तो कटेंगे’

रिस्की यदुवंशी ने लिखा, ‘यूपी में बिजली 10% महंगी हो गई है अब आप देश हित में जायदा योगदान दे पाएंगे। अगर पहले 1000 हजार बिल दे रहे थे तो अब 1100 दे पाएंगे।’

क्या है हकीकत? पड़ताल में हमे समाचार एजेंसी ANI पर उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) का एक नोटिफिकेशन मिला। इसके मुताबिक उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने 26 मार्च 2025 को जारी नियमों के तहत Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) लागू किया है।

इस व्यवस्था के अनुसार बिजली खरीद, ईंधन और ट्रांसमिशन लागत में होने वाले अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं से एक अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है।  मार्च 2026 के लिए FPPAS की गणना की गई है। नियम 16(4) के अनुसार मार्च 2026 का FPPAS 10 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जिसे जून 2026 के बिजली बिलों में वसूला जाएगा। इसलिए UPPCL के आईटी निदेशक को निर्देश दिया गया है कि इस 10 प्रतिशत FPPAS को सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में लागू किया जाए। साथ ही इसकी विस्तृत गणना वेबसाइट पर भी अपलोड की जाए।

वहीं TOI की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने स्पष्ट किया कि जून 2026 के लिए प्रस्तावित 10% Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) अस्थायी है और इसे बिजली दरों (टैरिफ) में वृद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। प्रदेश में उपभोक्ताओं के लिए बिजली का मूल टैरिफ लगभग छह वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है।

UPPCL के अनुसार, FPPAS की गणना UPERC के MYT Regulations, 2025 के तहत की जाती है। इसमें तीन महीने पहले की अवधि के लिए वास्तविक बिजली खरीद लागत और नियामक द्वारा स्वीकृत लागत के बीच के अंतर को आधार बनाया जाता है। इसी कारण यह अधिभार हर महीने बदलता रहता है और कई बार नकारात्मक (Negative) भी हो सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती है।

UPPCL ने उदाहरण देते हुए बताया कि फरवरी 2026 में FPPAS 10% था जबकि मार्च 2026 में यह घटकर -2.42% हो गया था। अप्रैल 2025 से जून 2026 के बीच यह कभी सकारात्मक तो कभी नकारात्मक रहा है। इससे स्पष्ट है कि यह न तो स्थायी शुल्क है और न ही बिजली दरों में वृद्धि का संकेत।बिजली निगम ने बताया कि जून 2026 के लिए प्रस्तावित 10% FPPAS मुख्य रूप से कुछ एकमुश्त (One-Time) भुगतानों के कारण आया है, जिन्हें Appellate Tribunal for Electricity (APTEL) के आदेशों के अनुपालन में किया गया। इनमें NTPC को राख (Ash) परिवहन शुल्क से जुड़े बकाया का भुगतान और Central Transmission Utility (CTU) के पिछले वर्षों के लंबित बकायों का निपटान शामिल है। इन भुगतानों के कारण बिजली खरीद लागत अस्थायी रूप से बढ़ गई, जिसका असर FPPAS पर पड़ा।

इसका मतलब क्या है?

1. बिजली का टैरिफ (Tariff) और FPPAS अलग-अलग चीजें हैं

  • टैरिफ वह मूल दर है जिस पर बिजली बेची जाती है, जैसे प्रति यूनिट ₹6, ₹7 या ₹8। यह दर UPERC तय करता है और इसे बदलने के लिए औपचारिक टैरिफ आदेश जारी करना पड़ता है।
  • वहीं FPPAS एक अतिरिक्त समायोजन शुल्क है, जो बिजली खरीदने और ट्रांसमिट करने की वास्तविक लागत में अंतर आने पर अस्थायी रूप से लगाया जाता है। इसलिए यदि जून 2026 के बिल में 10% FPPAS जोड़ा गया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार या नियामक ने बिजली के मूल रेट 10% बढ़ा दिए हैं।

2. जून 2026 में बिल अधिक क्यों आएगा?

  • UPPCL के अनुसार मार्च 2026 के दौरान बिजली खरीद और ट्रांसमिशन से जुड़े कुछ अतिरिक्त खर्च हुए थे।
  • इनमें प्रमुख रूप से NTPC को राख (Ash) परिवहन शुल्क से जुड़े बकाया और Central Transmission Utility (CTU) के पुराने लंबित बकायों का भुगतान शामिल हैं।
  • इन खर्चों के कारण बिजली खरीद की वास्तविक लागत बढ़ गई। MYT Regulations 2025 के तहत यह अतिरिक्त लागत उपभोक्ताओं से FPPAS के रूप में वसूली जा सकती है। इसलिए जून 2026 के बिल में 10% FPPAS जोड़ा जा रहा है।

3. क्या यह 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हमेशा रहेगी?

  • FPPAS हर महीने नई गणना के आधार पर तय होता है।

उदाहरण के लिए:

  • किसी महीने 10% हो सकता है।
  • अगले महीने 2% रह सकता है।
  • किसी महीने 0% हो सकता है।
  • कुछ मामलों में यह नकारात्मक (-) भी हो सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती है।

यही वजह है कि UPPCL इसे ‘अस्थायी समायोजन शुल्क’ बता रहा है, न कि स्थायी बिजली दर वृद्धि।

4. उपभोक्ता के लिए वास्तविक असर क्या होगा?

बिजली का मूल रेट नहीं बदला है लेकिन अतिरिक्त 10% FPPAS लगने के कारण कुल बिल बढ़ेगा। उपभोक्ता के दृष्टिकोण से उसे सिर्फ जून के बिल में 10 प्रतिशत अधिक भुगतान करना पड़ेगा।

अपनी पड़ताल में हमे UPPCL की वेबसाइट पर प्रत्येक माह का FPPAS आदेश मिला। इनके अनुसार मार्च 2026 में FPPAS 10 प्रतिशत, फरवरी 2026 में -1.52 प्रतिशत और जनवरी 2026 में 2.14 प्रतिशत निर्धारित किया गया था। इससे स्पष्ट है कि FPPAS की दर हर महीने बदलती रहती है और यह कोई स्थायी शुल्क नहीं है।

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