सोशल मीडिया में एक दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश बीफ एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा हब बन गया है। इस एक्सपोर्ट को गाय से जोड़ा गया है।
एक इन्स्टाग्राम यूजर 𝗥𝗶𝘆𝗮𝗹 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 ने यूपी की सीएम योगी आदित्यनाथ की गोवंश के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा बीफ़ निर्यात केंद्र बन गया है, जिसका निर्यात मूल्य लगभग 646.8 मिलियन तक पहुँच गया है। इन आँकड़ों ने राजनीतिक और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर ज़ोरदार बहस छेड़ दी है, जिसमें यूज़र्स राज्य में इस निर्यात उद्योग के आर्थिक, कृषि और राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा कर रहे हैं।’
क्या है हकीकत? पड़ताल में हमने इस सम्बन्ध में गूगल सर्च किया तो पता चला कि उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश गौहत्या निवारण अधिनियम, 1955 लागू है। कानून के अनुसार गायों की हत्या, गोमांस की बिक्री और परिवहन प्रतिबंधित है। राज्य सरकार से परमिट प्राप्त करने पर ही मवेशियों को राज्य के एक भाग से दूसरे भाग में ले जाया जा सकता है। यह कानून गायों और उनके बछड़ों को शारीरिक रूप से नुकसान पहुँचाने को अपराध मानता है, जिससे गायों के जीवन को खतरा हो सकता है। इसमें गायों को भोजन या पानी न देना भी शामिल है। कानून का उल्लंघन करने पर जुर्माना या कारावास हो सकता है।

वहीं प्रदेश सरकार ने साल 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उप्र गो-वध निवारण (संशोधन) विधेयक 2020 के जरिए गो हत्या कानून को सख्त बना दिया। यह विधेयक भी दोनों सदनों से पास हो गया। इसमें गो हत्या पर 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया। गोवंश को शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाने पर एक साल से सात सात तक की सजा होगी।

यूपी सरकार के सूचना विभाग ने बताया कि ऊत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 दिनांक 06 जनवरी, 1956 को प्रदेश में लागू हुआ था। वर्ष 1956 में इसकी नियमावली बनी। वर्ष 1958, 1961, 1979 एवं 2002 में अधिनियम में संशोधन किया गया तथा नियमावली का वर्ष 1964 व 1979 में संशोधन हुआ। परन्तु अधिनियम में कुछ ऐसी शिथिलताएं बनी रहीं, जिसके कारण यह अधिनियम जन भावना की अपेक्षानुसार प्रभावी ढंग से कार्यान्वित न हो सका और प्रदेश के भिन्न-भिन्न भागों में अवैध गोवध एवं गोवंशीय पशुओं के अनियमित परिवहन की शिकायतें प्राप्त होती रही थीं।
राज्य सरकार ने आगे बताया कि जन भावना की अपेक्षा का आदर करते हुए यह आवश्यक हो गया कि गोवध निवारण अधिनियम को और अधिक सुदृढ़, संगठित एवं प्रभावी बनाया जाए। इन्हीं बिन्दुओं पर विचार करते हुए वर्तमान गोवध निवारण अधिनियम, 1955 में संशोधन किए जाने का निर्णय लिया गया।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की आधिकारिक जानकारी के अनुसार भारत Animal products में सबसे ज्यादा ‘Buffalo Meat’ एक्सपोर्ट करता है। 2024-25 में भारत ने 4 अरब डॉलर से ज्यादा का Buffalo Meat’ एक्सपोर्ट किया। रिपोर्ट के मुताबिक मांस उत्पादन करने वाले शीर्ष पांच राज्य में पश्चिम बंगाल (12.62%), उत्तर प्रदेश (12.29%), महाराष्ट्र (11.28%), तेलंगाना (10.85%) और आंध्र प्रदेश (10.41%) शामिल हैं ये सभी मिलकर देश के कुल मांस उत्पादन में 57.45% का योगदान देते हैं। (स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट 2023-24, DAHD)।
एपीडा के ‘इंडियन मीट इंडस्ट्री – रेड मीट मैनुअल’ में साफ लिखा है कि मौजूदा विदेश व्यापार नीति के तहत बीफ़ (गाय, बैल, बछड़े का मांस) और हड्डी वाले भैंस के मांस का निर्यात प्रतिबंधित है और इसे निर्यात करने की अनुमति नहीं है। हालांकि भेड़ और बकरी के मांस तथा बिना हड्डी वाले भैंस के मांस का निर्यात पूरी तरह से अनुमत है, बशर्ते नीति में निर्धारित शर्तों का पालन किया जाए। आगे यह भी कहा गया है कि मांस केवल APEDA के साथ पंजीकृत बूचड़खानों और मांस प्रोसेसिंग प्लांटों से प्राप्त किया जाना चाहिए।

साल 2019 में एक आरटीआई में 1947 से 2018 तक भारतीय गाय प्रजातियों के बीफ निर्यात के डेटा की मांग की गई थी, इसके जवाब में APEDA की तरफ से बताया गया है कि भारत सरकार की तरफ से गोमांस के निर्यात की अनुमति नहीं है। जवाब में कहा गया था, ‘भारत सरकार द्वारा बीफ (गाय का मांस) का निर्यात अनुमति नहीं है, इसलिए कोई निर्यात तिथि उपलब्ध नहीं है।’

दरअसल जब बीफ की बात होती है तो इसका मतलब सिर्फ गोमांस नहीं होता। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक अंग्रेजी में अलग-अलग तरह के मांस के लिए अलग शब्द हैं। जैसे भेड़ और बकरी के मांस के लिए मटन है, मुर्गे के मांस के लिए चिकन है इसी तरह से गाय के मांस के लिए बीफ शब्द इस्तेमाल होता है, जो फ्रेंच शब्द ब’अफ़ से लिया गया है लेकिन भैंस, बैल और इस तरह के कई पशुओं के मांस को भी बीफ ही कहते हैं।
बीबीसी ने साल 2014 में प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में भी बताया है कि भारत से होने वाले ‘बीफ’ के निर्यात को लेकर काफी हंगामा रहा है और मांग उठती रही है कि इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए लेकिन भारत से निर्यात होने वाला बीफ़ दरअसल भैंस का मांस है, गोमांस नहीं। बीफ़ निर्यात करने वाली कंपनी ‘मिरहा एक्सपोर्ट्स’ के प्रबंध निदेशक शुआब अहमद के अनुसार यह कहना ग़लत है कि भारत से निर्यात होने वाला ‘बीफ’ गोमांस है।

