उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाति हमेशा से एक निर्णायक कारक रही है। आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच एक बार फिर जातिगत समीकरणों और सामाजिक ध्रुवीकरण की चर्चा तेज है। ऐसे माहौल में सोशल मीडिया पर किसी भी अपराध, विवाद या स्थानीय घटना को जातिगत उत्पीड़न के रूप में पेश किए जाने का असर केवल जनमत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित करता है।
पिछले कुछ वर्षों में समाजवादी पार्टी और उससे जुड़े कई सोशल मीडिया हैंडल्स ने उत्तर प्रदेश की विभिन्न घटनाओं को दलित, पिछड़ा या किसी विशेष जाति के उत्पीड़न के उदाहरण के रूप में प्रचारित किया। हालांकि, इनमें से कई मामलों में बाद की जांच, पुलिस रिकॉर्ड और स्थानीय तथ्यों ने एक अलग तस्वीर पेश की। इस रिपोर्ट में हम ऐसे ही कुछ मामलों की पड़ताल कर रहे हैं, जिनमें घटनाओं को जातिगत रंग देकर पेश किया गया लेकिन बाद में तथ्य उस नैरेटिव का समर्थन नहीं कर पाए।
| क्रमांक | दावा | सपा से जुड़े दावेदार | हकीकत |
|---|---|---|---|
| 1. | झाँसी में दलित बच्चे के साथ दुष्कर्म की घटना। बाबा के सरकार की पुलिस कहां सोई हुई है। | समाजवादी पार्टी पूर्व प्रदेश सचिव शिवम शेरा यादव | यह वीडियो वायरल 6 साल पुराना है। वीडियो में दिख रहा व्यक्ति बच्चे के साथ कोई अश्लील हरकत नहीं कर रहा था, बल्कि उसे गुटखा खाने से रोकने और समझाने के लिए डांट-फटकार रहा था। यह बच्चा भी दलित नहीं, मुस्लिम समुदाय से है। |
| 2. | चंदौली में समाजवादी पार्टी की महिला जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल को पीटा गया। अमित पांडे और सूरज सिंह ने हमला किया। योगी सरकार में पीडीए समाज सुरक्षित नहीं है। | समाजवादी पार्टी नेता आईपी सिंह, जीतू यादव। | सपा की महिला नेता गार्गी सिंह पर अमित यादव, मनोज यादव, मोनी यादव तथा उर्मिला यादव ने पैसों के पुराने विवाद को लेकर मारपीट की थी। |
| 3. | यूपी की भाजपा सरकार में 2024 से 2026 तक राजभर समाज के 22 लोगों की हत्या हो गई। किसी को न्याय नहीं मिला हत्या करने वाले सब सरकार से ही जुड़े लोग हैं। | सपा नेता विशाल ज्योतिदेव अग्रवाल, मनीष यादव, सूर्या समाजवादी, पंकज राजभर | राजभर समाज के युवकों की हत्याओं का मामला जातिगत नहीं हैं। न ही यह हत्याएं सुनियोजित हैं, यह घटनाएँ नाच बंद कराने, मछली चोरी, प्रेम प्रसंग, पैसों के विवाद जैसे मामलों से सम्बंधित हैं। अधिकांश घटनाओं में पीड़ित और आरोपी एक ही जाति राजभर से हैं। घटनाओं में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था। |
| 4. | एक दलित की चिता सिर्फ इसीलिए रोक दी गयी क्योंकि उसका धुआं ब्राह्मणों के श्मशान तक जा रहा था। | कौशाम्बी से समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज, सत्या यादव | उत्तर प्रदेश के अमेठी में मक्खन सिंह की हत्या कर दी गयी थी। मृतक के परिजनों ने हत्या के खुलासे को लेकर शव के साथ विरोध प्रदर्शन किया था। इस मामले में मृतक दलित नहीं, ठाकुर जाति से था। |
| 5. | अमेठी में एक दलित युवक की हत्या कर दी गई। इस सरकार में दलितों पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है। | सपा प्रवक्ता मनोज यादव, सूर्या समाजवादी | अमेठी में दलित युवक सागर कोरी की हत्या उसी की जाति की युवती कुमकुम और उसके जीजा वेद प्रकाश कोरी ने की थी। सागर कोरी ने युवती और उसके जीजा का आपत्तिजनक वीडियो बना लिया था, उसे वायरल करने की धमकी देकर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। |
| 6. | धीरेन्द्र शाश्त्री ने कहा कि ब्राह्मण लड़कियों को मनुस्मृति का पालन करना चाहिए, पढाई लिखाई और नौकरी नहीं करनी चाहिए। | समाजवादी लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामकरन निर्मल | धीरेन्द्र शाश्त्री ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था, यह एक एडिटेड पोस्टकार्ड है। |
| क्रमांक | दावा | सपा से जुड़े दावेदार | हकीकत |
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| 7. | उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले में दलित समाज से आने वाले पूर्व ग्राम प्रधान मुकेश खटीक की खेत में पानी लगाते समय दबंग सवर्ण जाति के लोगो ने हत्या कर दी। | समाजवादी पार्टी समर्थक मधुर यादव | बुलंदशहर में पूर्व प्रधान मुकेश खटीक की हत्या उनके साथ शराब पीने वाले दोस्तों ने ही की थी। मुकेश का उसके दोस्त कुम्मन से विवाद हुआ था। कुम्मन भी जाति से खटीक है। |
| 8. | उत्तर प्रदेश के मेरठ में ठाकुरों ने प्रजापति समाज की बारात डीजे से नहीं निकलने दी। | सपा समर्थक शिवम यादव, महिमा यादव, प्रज्ज्वल यादव | मेरठ के सरधना क्षेत्र की इस घटना में एक पक्ष के परिवार महिला की मौत हो गयी थी, इस वजह से उन्होंने दूसरे पक्ष से डीजे बजाने पर आपत्ति की। इससे पहले तक डीजे को पूरे गांव में बजाया गया था। इस मामले में जातिगत विवाद नहीं है। |
| 9. | गोरखपुर में एक ब्राह्मण अभिषेक पाठक को गोली मार दी गयी। ब्राह्मणों को समझ आएगा या नहीं। | समाजवादी पार्टी समर्थक एक्स अकाउंट लूफी | गोरखपुर में अभिषेक पाठक का आरोपी सूरज पांडेय से रुपयों को लेकर विवाद था। इसी विवाद में सूरज पांडेय ने अभिषेक पाठक की गोली मरकर हत्या कर दी। इस मामले में आरोपी और पीड़ित एक ही जाति से हैं। |
| 10. | बस्ती में एक दलित बच्चे को सामंतवादियों ने जमकर नग्न करके पीटा, पेशाब पिलाया और थूक चटवाया, न्याय न मिलने पर उसने आत्महत्या की। इस सरकार में दलितों पर अत्याचार चरम पर है | समाजवादी पार्टी मीडिया सेल, सूर्या समाजवादी | बस्ती में मृतक के मामा विजय कुमार ने हमे बताया कि उनका भांजा बर्थडे पार्टी में गया था, जहाँ उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया है। पुलिस ने इस पर एक्शन नहीं लिया, इस वजह से भांजे ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने बताया कि इस मामले में जात-बिरादरी वाली कोई बात नहीं हैं, दोनों ही पक्ष दलित हैं। बस्ती एसपी गोपालकृष्ण चौधरी ने भी कहा है कि दोनों ही पक्ष एक ही बिरादरी से हैं। |
| 11. | सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बयान में कहा कि हमे दलित, मुस्लिम, यादव का वोट नहीं मिलेगा तब भी हम सरकार बना लेंगे। | सपा नेता आईपी सिंह, राहुल यादव, आनन्द यादव | यह एनबीटी का एडिटेड पोस्टकार्ड है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने किसी जाति को लेकर ऐसा बयान नहीं दिया। |
| क्रमांक | दावा | सपा से जुड़े दावेदार | हकीकत |
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| 12. | सीतापुर में होली के दिन ब्राह्मण पुजारी संकुल मिश्रा की हत्या कर दी गयी। ये सिलसिला 2017 से अनवरत जारी है। | सपा नेता आईपी सिंह | सीतापुर के रामकोट थाना क्षेत्र में मंदिर के पुजारी संकुल मिश्रा उर्फ हिमांशु की हत्या रामदेव बाजपेई उर्फ देवा ने की थी। रामदेव बाजपेई के मुताबिक मैं भी मंदिर पर पूजा पाठ करने आता जाता था, संकुल बहुत झगड़ालू था जब जब मैं मंदिर पर जाता था तो वह गाली गलौज करता था उसकी इस हरकत से मैं आजिज हो चुका था। इस प्रकरण में दोनों पक्ष एक ही जाति से हैं। |
| 13. | योगी जी ब्राह्मण मुक्त उतर प्रदेश बना रहे हैं। प्रतापगढ़ में पिता दयाशंकर मिश्रा एवं बेटे आनंद की हत्या कर दी गयी। | शुभी यादव | प्रतापगढ़ के रानीगंज थाना क्षेत्र में दयाशंकर मिश्र का पड़ोसी चंद्रमणि मिश्र से जमीन को लेकर करीब 40 साल से विवाद चला आ रहा था। इसी को सुलझाने को लेकर विवाद में दोनों में झगड़ा हुआ था। दोनों पक्ष एक ही जाति से हैं। |
| 14. | बीजेपी प्रत्याशी अरुण गोविल ने मेरठ में दलित के घर खाना नहीं खाया। | सपा विधायक लालजी वर्मा | बीजेपी प्रत्याशी अरुण गोविल ने दलित परिवार के खाना खाया था। उनका वायरल वीडियो एडिटेड है। |
| 15. | यूपी में दलित सुरक्षित रह सकता है, गोरखपुर में दो दलित बच्चों की हत्या की गयी। | प्रदीप यादव | गोरखपुर में दो बच्चों की हत्या की घटना कुकर्म के मामले में एक आरोपी को चिढाने की वजह से हुई थी। इस प्रकरण में जातिगत एंगल नहीं है। |
| 16. | बदायूं में सेना के एक जवान की मौत के बाद उसका परिवार समाधि स्थल बनाना चाहता है लेकिन ब्राह्मण समाज के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। | अजय प्रजापति, इंदर बजरंगी, | बदायूं के बिसौली कोतवाली क्षेत्र में राजेश कुमार प्रजापति का अंतिम संस्कार गांव की सरकारी खलिहान की भूमि पर हुआ था। इस जमीन पर एक प्राचीन मंदिर है, साथ ही यहाँ बारात घर और अस्थाई यज्ञशाला है। खलिहान की सरकारी भूमि कोई निजी निर्माण नहीं हो सकता। सैनिक के समाधि स्थल के लिए दूसरी जगह भूमि मुहैया करने की बात कही गयी है। |
स्क्रीनशॉट
| क्रमांक | दावा | सपा से जुड़े दावेदार | हकीकत |
|---|---|---|---|
| 17. | सुल्तानपुर में ठाकुरों ने सुरेश यादव के घर पर हमला किया। | सपा नेता मनोज यादव, ऐके स्टॅलिन, सूर्य समाजवादी और मनीष यादव | सुरेश यादव के परिवार पर हमले की घटना में कोई जातिगत एंगल नहीं है। मामला दो भाई सुरेश यादव और अरविंद यादव के बीच जमीन विवाद का था। जिसमें अरविंद यादव ने राणा अजीत प्रताप सिंह के साथ कथित तौर पर जमीन कब्जाने का प्रयास किया था। |
| 18. | यूपीएससी परीक्षा के इंटरव्यू में आरक्षित वर्ग को सामान्य वर्ग से कम नम्बर दिए गए। | सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी | यह दावा पूरी तरह गलत है, आरक्षित वर्ग के कई उम्मीदवार को अनारक्षित वर्ग से ज्याद नम्बर मिले हैं। |
| 19. | उत्तर प्रदेश में एक और ब्राह्मण पुजारी शत्रुहन द्विवेदी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह पहली बार नहीं है कि राज्य में किसी पुजारी की हत्या की गई हो। | सपा नेता माता प्रसाद | राध कृष्ण मंदिर पुजारी शत्रुहन द्विवेदी की हत्या की वारदात को राघवेंद्र तिवारी, मोहित वर्मा और साजन तिवारी ने अंजाम दिया था। शत्रुहन द्विवेदी का चचेरा भाई विवेक द्विवेदी एक आरोपी साजन तिवारी की बहन को अपने साथ भाग ले गया था। इस बात को लेकर राघवेंद्र व साजन तिवारी में आक्रोश था। घटना में जातिगत एंगल नहीं है। |
| 20. | आजमगढ़ में अखिलेश यादव के नए घर का गृह प्रवेश पीडीए के पुजारी चंदन कुशवाहा ने कराया। | सूर्या समाजवादी, अमित यादव, अनिल यादव | आजमगढ़ में नए घर का गृह प्रवेश स्थानीय ब्राह्मण पुजारी चंदन पांडे और श्याम धर चौबे ने करवाया था। दोनों ब्राह्मण पुजारी हैं। |
| 21. | मेरठ में ठाकुरों ने बारातियों के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि इस गांव में ठाकुरों का डीजे बजेगा। दलित डीजे नहीं बजाएगा। ठाकुरों में लूटपाट की। | लक्ष्मण यादव | मेरठ के कालन्दी गांव में शराब के नशे में युवकों ने झगड़ा किया। इस दौरान उन्होंने दलितों को डीजे बजाने का विरोध नहीं किया। न ही गांव में सिर्फ ठाकुरों की शादी में डीजे बजाने की बात की थी। इस मामले में लूटपाट के आरोप भी भ्रामक हैं। |
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| क्रमांक | दावा | सपा से जुड़े दावेदार | हकीकत |
|---|---|---|---|
| 22. | महाभारत का काल रामयाण से बाद का है, इसके बावजूद महाभारत में रामायण का जिक्र नहीं मिलता। | सपा नेता लोटन राम निषाद | महाभारत के तीसरे पर्व ‘वनपर्व’ के उपपर्व ‘तीर्थयात्रा पर्व’ और ‘रामोपाख्यान’ में रामायण और उसके पात्रों की बात की गयी है। साथ ही रामायण के हनुमान, जामवंत समेत कई पात्र महाभारत काल में भी मौजूद थे। |
| 23. | मध्य प्रदेश के उज्जैन में जय श्री राम का नारा लगाते हुए सरदार पटेल की मूर्ति तोड़ दी गयी। | सपा समर्थक एके स्टालिन | सरदार पटेल की प्रतिमा को भीम आर्मी के लोगों ने तोडा था, इस दौरान आरोपी जय श्री राम नहीं, जय भीम का नारा लगा रहे थे। |
| 24. | सिद्दार्थनगर में मुस्लिम युवक फैजल खान को पीटा गया। | सपा नेता आईपी सिंह | सिद्दार्थनगर में दोनों पक्षों में कहासुनी की वजह से फैजल खान को पीटा गया था। आरोपियों में मुस्लिम युवक भी शामिल हैं। |
| 25. | संभल में सर्वे टीम मस्जिद में जाते हुए धार्मिक लगाए, इस वजह से दंगा हुआ था। | सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव , सपा सांसद ज़िया उर रहमान बर्क | सर्वे के लिए टीम शांतिपूर्वक जामा मस्जिद में दाखिल हुई थी। इस दौरान बाहर दंगे शुरू हो चुके थे। सर्वे खत्म होने के बाद वापस आते हुए धार्मिक नारा लगाया गया था। |
| 26. | महाकुम्भ में बाबा मांस खा रहे हैं। | सपा नेता लोटन राम निषाद | यह वीडियो महाकुम्भ की शुरुआत से पहले का है। |
| 27. | बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के चार पिता थे। | सपा नेता लोटन राम निषाद | धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का वायरल वीडियो एडिटेड है। असल वीडियो में धीरेन्द्र शास्त्री ने श्रीराम के पिता दशरथ के अलावा अन्य चार लोगों को पिता समान बताया है। |
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| क्रमांक | दावा | सपा से जुड़े दावेदार | हकीकत |
|---|---|---|---|
| 28. | भारत में मुसलमानों पर हमला हो रहा है। सनातनी लोगों ने मुसलमान महिला को पीटा है। | सपा नेता परमानन्द आजमगढ़ी | बुर्कानशी महिला के साथ मारपीट का यह वीडियो भारत नहीं, बांग्लादेश का है। |
| 29. | गाजियाबाद में हिंदूवादी भीड़ ने मुस्लिम भाई बहन को पीटा गया। | एके स्टालिन | गाजियाबाद में मुस्लिम भाई-बहन को पीटने का दावा गलत है। हापुड़ में एक युवती ने आरोपी अरमान पर जबरदस्ती करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद युवक को पीडिता के परिवार ने पीटा था। |
| 30. | कथावाचक ऋचा मिश्रा, चित्रलेखा और धीरेन्द्र शाश्त्री की बहन की शादी मुसलमान से हुई है। | सपा नेता लौटन प्रसाद | कथावाचक ऋचा मिश्रा अविवाहित हैं। धीरेन्द्र शाश्त्री की बहन की शादी एक हिंदू ब्राह्मण से हुई हुई है। साथ ही चित्रलेखा का विवाह भी हिंदू ब्राह्मण से हुआ है। |
| 31. | बीजेपी जितना मंदिर तोड़ रही है उतने किसी आक्रांता ने भी नहीं तोड़े, आरएसएस वाले मंदिर तोड़ रहे हैं। | समाजवादी पार्टी समर्थक सूर्या समाजवादी , अमित यादव | यह वीडियो झारखंड के गिरिडीह में स्थित पंच शिव मंदिर का है। ये वीडियो करीबन एक साल पुराना है। नए मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था। तब इस पुराने मंदिर को गांव वालों द्वारा विधिवत पूजा पाठ के साथ हटाया गया था। |
| 32. | कुशीनगर में दबंगों ने नाबालिक अभय यादव की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी। योगी सरकार तो पीडीए की हत्या पर सिर्फ मूकदर्शक बनकर काम करती है। | सूर्य समाजवादी, शिवकांत यादव | कुशीनगर में खेत पर कब्जे को लेकर अजय यादव और सागर यादव के बीच विवाद था। रवि यादव और अजय यादव पक्ष के बीच मारपीट हुई। जिसमे रवि यादव की मौत हो गयी, दोनों पक्ष एक ही जाति से हैं। |
| 33. | प्रयागराज में महेंद्र प्रजापति की हत्या कर दी गयी। यूपी प्रजापति समाज की हत्याओं का गढ़ बन गया है। | सपा समर्थक अजय प्रजापति, आलोक प्रजापति | प्रयागराज में महेंद्र प्रजापति की हत्या की वारदात को उसकी ही जाति और परिवार के सदस्य आकाश प्रजापति, रोहित प्रजापति और उनके साथी विजय भारती ने अंजाम दिया था। |
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| क्रमांक | दावा | सपा से जुड़े दावेदार | हकीकत |
|---|---|---|---|
| 34. | आगरा में एक दलित युवक की बारात पर हमला कर दिया। जातिसूचक गालियां देते हुए दूल्हे पर बंदूक तान दी और उसे घोड़ी से उतार दिया। | समाजवादी पार्टी | आगरा में दोनों पक्षों में शादी का कार्यक्रम था। रास्ता कम चौड़ा होने की वजह से दोनों पक्ष आमने सामने आ गए। वहां से निकलने को लेकर विवाद हुआ था। दूल्हे को घोड़ी से उतारने की कोई घटना नहीं हुई थी। |
| 35. | भाजपा सरकार में आदिवासी समाज के साथ अत्याचार, मध्यप्रदेश के उज्जैन में आदिवासी युवक के साथ हुई अमानवीयता पूर्ण घटना अत्यंत निंदनीय है। जहां युवक को पेशाब पिलाया गया। सिर के बालों को काट दिया गया। जूतों की माला पहनाई गई। | समाजवादी पार्टी प्रवक्ता आशुतोष वर्मा, समाजवादी प्रहरी | मध्य प्रदेश के उज्जैन में जितेंद्र बंजारा नामक युवक पर विवाहिता को भगाकर ले जाने का आरोप लगाते हुए उसका मुंडन किया गया। इस मामले में पुलिस ने पेपाबाई बंजारा, बाबू बंजारा और जीवन बंजारा को भी गिरफ्तार किया था। दोनों पक्ष एक ही जाति से हैं। |
| 36. | यूपी में हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी की गिरफ्तारी के बाद ब्राह्मण विरोध कर रहे हैं। सड़कों पर ‘योगी पर भारी विनय तिवारी’ नारे लगाये गए। | सपा कार्यकर्त्ता आकाश शंखधार , शिवम यादव, समाजवादी प्रहरी | यह वीडियो दिसम्बर 2021 का है। उस दौरान विनय शंकर तिवारी ने बसपा छोड़कर सपा का दामन थामा था। |
| 37. | शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने वीडियो कॉल पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को फटकार लगाई। | सपा समर्थक संजय यादव, योगेश यादव, आकाश शंखधार | शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद वीडियो में योगी आदित्यनाथ से बात नहीं कर रहे थे। उन्होंने यूट्यूब चैनल से बात करते हुए सीएम योगी की आलोचना की थी। |
| 38. | जलालाबाद में दबंगों-भाजपा नेता ने नेतराम कुशवाहा को पीटा। | सपा नेता अरविन्द गिरी, शिवम यादव, आकाश शंखधार, जयसिंह | यह वीडियो साल 2018 है। शाहजहाँपुर के जलालाबाद थाना क्षेत्र में नेतराम कुशवाहा का अपने चचेरे बहनोई रनवीर पक्ष से विवाद हुआ था। दोनों पक्षों की मारपीट में रनवीर के बेटे सरोज की मौत हो गयी थी, इसके बाद पुलिस ने नेतराम कुशवाहा और उनके चाचा मदनपाल को गिरफ्तार किया था। |
| 39. | मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने लोधी समाज से बीजेपी को वोट न देने की अपील की है और भाजपा को कड़ा सबक सिखाने को कहा। | सपा नेता संतोष कुमार यादव, आईपी सिंह | उमा भारती का वायरल वीडियो एडिटेड है, मूल वीडियो में उमा भारती शराब नीति के खिलाफ धरना दे रही हैं, इस वीडियो को एडिट कर उमा भारती की फर्जी आवाज को जोड़ा गया है। |
| क्रमांक | दावा | सपा से जुड़े दावेदार | हकीकत |
|---|---|---|---|
| 40. | रायबरेली में सामंतवादियों ने दलित युवक को पीटा और जूता चटवाया। | सपा नेता मनोज यादव, सूर्या समाजवादी, शंकर सिंह | इस घटना में पीड़ित अजय सिंह और आरोपी एक ही जाति वर्ग से हैं। आरोपी और पीड़ित दोनों आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और इनके बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। |
| 41. | सुल्तानपुर में दलित युवक नवनीत कोरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई इस सरकार में पीडीए समाज पर अत्याचार बढ़ता जा रहा। | सूर्य समाजवादी, राजन यादव, शिवम यादव | सुल्तानपुर में नवनीत कोरी की हत्या में जातिगत एंगल नहीं है। नवनीत ने गांव की शिवानी नाम की लड़की के साथ लव मैरिज की थी। शिवानी का भाई इस शादी के खिलाफ था। जिस वजह से उसने नवनीत की हत्या कर दी। दोनों पक्ष एक ही वर्ग के हैं। |
| 42. | उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में 16 वर्षीय दलित युवती के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर की गयी। | समाजवादी पार्टी | अम्बेडकरनगर में दलित युवती की हत्या उसके प्रेमी ने ही की है। इस घटना में जातिगत एंगल नहीं है, दोनों पक्ष दलित समुदाय से हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। |
| 43. | लखनऊ में 35 साल के अंकित लोधी की सर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले कानपुर में रवि यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी यूपी में रोज दलित ,पिछड़े और मुसलमान की हत्या हो रही है !’ | लफी,विश्वजीत यादव | अंकित लोधी और रवि यादव की हत्या में जातिगत एंगल नहीं है। दोनों हत्याएं निजी विवादों और आपराधिक रंजिश के कारण हुई थीं। |
ऐसे फर्जी जातिगत दावों का असर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाति दशकों से एक निर्णायक कारक रही है। चुनावी रणनीतियों से लेकर राजनीतिक विमर्श तक, जातीय पहचान अक्सर राजनीतिक दलों और मतदाताओं के व्यवहार को प्रभावित करती है। ऐसे में किसी भी अपराध, हिंसा, विवाद या प्रशासनिक घटना को जातिगत उत्पीड़न के रूप में प्रस्तुत करना केवल एक सूचना साझा करने का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह समाज और राजनीति दोनों को प्रभावित करने वाला एक संवेदनशील विषय बन जाता है। आगामी चुनावों के मद्देनजर इसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि इस तरह के दावे मतदाताओं की धारणाओं, सामाजिक रिश्तों और राजनीतिक बहसों को प्रभावित कर सकते हैं।
सोशल मीडिया के दौर में किसी घटना का पहला नैरेटिव अक्सर सबसे ज्यादा प्रभावशाली साबित होता है। जब किसी हत्या, मारपीट, आत्महत्या, बलात्कार या अन्य विवाद को तत्काल एक जाति द्वारा दूसरी जाति के उत्पीड़न के रूप में प्रचारित किया जाता है, तो लाखों लोग उसी शुरुआती दावे के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं। बाद में यदि अलग तथ्य सामने भी आते हैं, तो वे उतनी तेजी से लोगों तक नहीं पहुंच पाते। नतीजतन, समाज के एक हिस्से में यह धारणा बन सकती है कि किसी विशेष समुदाय को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जा रहा है जबकि दूसरे समुदाय के लोगों में यह भावना पैदा हो सकती है कि उन्हें बिना तथ्यों के दोषी ठहराया जा रहा है। जब हर घटना को किसी समुदाय पर हमले के रूप में पेश किया जाता है, तब राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर भी एक विकृत तस्वीर बन सकती है।
समाजवादी पार्टी और उनके समर्थकों के इस प्रकार के भ्रामक या अधूरे दावे सामाजिक अविश्वास को बढ़ाने का काम कर सकते हैं। जिन लोगों का उस घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता, वे भी जातीय पहचान के आधार पर खुद को उस विवाद का पक्षकार मानने लगते हैं। इससे सामाजिक संवाद कमजोर पड़ सकता है और विभिन्न समुदायों के बीच अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है। राजनीतिक दृष्टि से भी ऐसे नैरेटिव महत्वपूर्ण होते हैं। चुनावी माहौल में जातिगत भावनाओं को प्रभावित करने वाली खबरें और दावे तेजी से वायरल होते हैं। राजनीतिक दलों, समर्थकों और सोशल मीडिया नेटवर्क्स के लिए यह एक ऐसा माध्यम बन सकता है जिसके जरिए वे अपने समर्थक समूहों को सक्रिय करें, विरोधियों पर हमला बोलें या किसी विशेष सामाजिक वर्ग में असुरक्षा अथवा असंतोष की भावना पैदा करें। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि किसी भी दावे को तथ्य के रूप में स्वीकार करने से पहले उसकी जांच की जाए और यह देखा जाए कि क्या उसे जानबूझकर जातिगत रंग देकर प्रस्तुत किया जा रहा है।
पीडीए एकता के नाम पर जातिगत उत्पीड़न का नैरेटिव
समाजवादी पार्टी पिछले कुछ वर्षों से पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) को अपने प्रमुख राजनीतिक और चुनावी नारे के रूप में प्रस्तुत कर रही है। इस अवधारणा का मूल उद्देश्य इन सामाजिक समूहों को एक साझा राजनीतिक पहचान के तहत संगठित करना बताया जाता है। लेकिन इस रिपोर्ट में शामिल कई मामलों का अध्ययन यह संकेत देता है कि सोशल मीडिया पर पीडीए एकता को मजबूत करने के लिए कई घटनाओं को तथ्यों से अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया। कई मामलों में हत्या, मारपीट, आत्महत्या, जमीन विवाद, प्रेम प्रसंग या व्यक्तिगत रंजिश जैसी घटनाओं को इस तरह प्रचारित किया गया मानो पीडीए समुदाय के किसी सदस्य को उसकी जाति या सामाजिक पहचान की वजह से निशाना बनाया गया हो। बाद की जांच में जब सामने आया कि आरोपी और पीड़ित एक ही जाति से थे, या विवाद का कारण निजी था, तब भी शुरुआती दावों द्वारा बनाया गया जातिगत नैरेटिव सोशल मीडिया पर फैल चुका था। इस रिपोर्ट में शामिल मामलों को देखने पर सवाल उठता है कि क्या पीडीए की एकता सामाजिक न्याय के आधार पर बनाई जा रही है या फिर झूठ, आधी-अधूरी जानकारियों और भ्रामक दावों के जरिए गुस्सा पैदा करके?
पीड़ित नहीं, उसकी जाति महत्वपूर्ण बना दी गई
इन मामलों में सबसे चिंताजनक बात यह है कि अपराध से ज्यादा महत्व पीड़ित की जाति को दिया गया। ऐसा लगता है कि हर घटना में सबसे पहले यह तलाशा गया कि पीड़ित किस जाति का है और फिर उसी पहचान के आधार पर राजनीतिक नैरेटिव खड़ा कर दिया गया।
यदि कोई यादव है तो “यादवों पर अत्याचार”।
यदि कोई राजभर है तो “राजभर समाज निशाने पर”।
यदि कोई दलित है तो “दलितों पर हमला”।
यदि कोई मुस्लिम है तो “मुसलमान असुरक्षित”।
निष्कर्ष: इस रिपोर्ट में शामिल मामलों से यह स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर कई घटनाओं को जातिगत, सांप्रदायिक या राजनीतिक रंग देकर प्रस्तुत किया गया, जबकि जांच में ऐसे दावे टिक नहीं पाए। यह प्रवृत्ति केवल गलत सूचना फैलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में विभाजन, अविश्वास और राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी बढ़ावा दे सकती है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां जाति चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण आधार है, वहां किसी भी घटना को बिना तथ्यात्मक पुष्टि के जातिगत संघर्ष के रूप में प्रचारित करना सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक विमर्श दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए ऐसे दावों की तथ्यात्मक जांच और सत्यापन पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।








