समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने एक समाचार चैनल के साथ इंटरव्यू में दावा किया कि पूरे देश में पांच शहरों में मेट्रों कहीं नहीं बन रही हैं, समाजवादी पार्टी ने 5 शहरों में मेट्रो बनवाई। उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक साथ पांच शहरों को मेट्रो की अनुमति दे दी थी। उसका परिणाम हुआ कि लखनऊ, कानपुर, आगरा, नोएडा से दिल्ली और नोएडा से ग्रेटर नोएडा जोड़ने का काम समाजवादी पार्टी की सरकार में हुआ। योगी सरकार ने लखनऊ की मेट्रो एक इंच आगे नहीं बढाई है, जहाँ तक मेट्रो जाती है, वहीँ से वापस लौट आती है।
क्या है हकीकत?
अपनी पड़ताल में हमने एक एक कर सभी मेट्रो को लेकर कीवर्ड्स गूगल सर्च किए।
लखनऊ मेट्रो: 27 सितम्बर 2014 को प्रकाशित दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ के 32 वाहिनी पीएसी के ग्राउंड में अखिलेश यादव ने मेट्रो का शिलान्यास तथा भूमि पूजन किया। लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना फेज-1 ए (नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर) के अंतर्गत ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक पहले चरण का काम होगा। आठ किमी के इस रूट पर आठ स्टेशन बनने हैं।
वहीं 1 दिसम्बर 2016 को प्रकाशित एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ मेट्रो के ट्रायल रन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री के हरी झंडी दिखाने के साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर से सिंगार नगर स्टेशन के बीच ट्रायल शुरू हो गया। मेट्रो का ट्रायल पहले ट्रांसपोर्ट नगर से मवैया के बीच में होगा, लेकिन पहले दिन यह सिंगार नगर तक ही चलेगी। इसके बाद दूसरे दिन से यह मवैया तक जाएगी। एक जनवरी, 2017 से चारबाग तक ट्रायल रन होगा। आम लोग 26 मार्च, 2017 से ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक मेट्रो में सफर कर सकेंगे।
Flagged off today the trial run of Lucknow Metro. We are focused on making transportation easier and convenient for the people of UP. pic.twitter.com/Zn3DCtoTKP
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 1, 2016
साल 2017 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद राज्य के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 सितम्बर 2017 को राज्यपाल राम नाइक और गृह मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में मंगलवार को मेट्रो सेवा का उद्घाटन किया गया। मेट्रो ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच चलेगी। यह सेवा सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक उपलब्ध होगी।
ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक चलने वाली लखनऊ मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। #जनताकीमेट्रो pic.twitter.com/eqTFJzjSh9
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) September 5, 2017
वहीं इस सम्बन्ध में आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ मेट्रो लाने का ख्वाब यूपी की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने देखा था। 2007 से 2012 के बीच जब वह सूबे की मुख्यमंत्री थीं तो 2011 में उन्होंने पहल करते हुए दो बार लखनऊ मेट्रो की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार को भेजी थी, इस प्रोजेक्ट को उस समय मंजूरी नहीं मिल सकी थी। इसके बाद लखनऊ मेट्रो परियोजना की शुरुआत 2013 में अखिलेश यादव सरकार ने की और 2017 में ये पूरी हो गई। विधानसभा चुनाव से पहले लखनऊ मेट्रो प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार भी नहीं हुआ था कि अखिलेश यादव ने महज दो मेट्रो स्टेशन के बीच मेट्रो का उद्घाटन कर दिया।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा आज उत्तर प्रदेश में मेट्रो रेल नेटवर्क को विस्तार देने हेतु ₹5,801 करोड़ की लागत से लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के Phase-1B को मिली स्वीकृति अभिनंदनीय है।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 12, 2025
इस परियोजना की लंबाई 11.165 किलोमीटर होगी और…
लखनऊ मेट्रो के विस्तार के सम्बन्ध में हमे 17 जून 2026 को प्रकाशित NDTV की रिपोर्ट भी मिली। रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ मेट्रो का एक ऐसा महाविस्तार होने जा रहा है, जिसके बाद इसका नेटवर्क रेलवे से भी बड़ा हो जाएगा। मेट्रो के सेकंड फेज के लिए जमीनी काम शुरू हो चुका है। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होते ही इसी साल जुलाई से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे अगले 10 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

कानपुर मेट्रो: 4 अक्टूबर 2016 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के साथ कानपुर शहर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। 13,721 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकारों का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जिसके लिए BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 50 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
वहीं 28 दिसम्बर 2021 को प्रकाशित एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर में 11,000 करोड़ रुपये की मेट्रो परियोजना के एक नए खंड का उद्घाटन करने के बाद मेट्रो में सफर किया। आईआईटी मेट्रो स्टेशन से गीता नगर तक की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद थे। आईआईटी-कानपुर से मोती झील तक का यह नौ किलोमीटर लंबा खंड रिकॉर्ड दो वर्षों में पूरा किया गया।
PIB ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया है कि यह 9 किलोमीटर लंबा खंड IIT कानपुर से मोती झील तक का है, जिसका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। कानपुर में मेट्रो रेल परियोजना की कुल लंबाई 32 किलोमीटर है, जिसमें दो कॉरिडोर हैं, जिनमें से 13 किलोमीटर भूमिगत होंगे। इसका निर्माण 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जा रहा है। कॉरिडोर 1 में 21 मेट्रो स्टेशन और कॉरिडोर 2 में 8 मेट्रो स्टेशन होंगे।
31 मई 2025 को प्रकाशित TOI की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएसए मैदान में आयोजित एक जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में कानपुर मेट्रो की यात्री सेवाओं के विस्तार का उद्घाटन किया। इसके साथ ही मौजूदा मेट्रो नेटवर्क में पांच नए भूमिगत स्टेशन – चुन्नीगंज, नवीन मार्केट, बड़ा चौराहा, नयागंज और कानपुर सेंट्रल – जुड़ गए हैं। यात्री लगभग 16 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर (आईआईटी कानपुर से कानपुर सेंट्रल तक) में यात्रा कर सकेंगे, जिसमें अब 14 स्टेशन हैं।
इस सम्बन्ध में ABP की रिपोर्ट में बताया गया है कि कानपुर मेट्रो का शिलान्यास 4 अक्टूबर 2016 को अखिलेश सरकार द्वारा किया गया था। 20 सितंबर 2017 को कानपुर मेट्रो के लिए केंद्र सरकार द्वारा दोबारा डीपीआर बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 5 सितंबर 2018 को यूपी सरकार ने कानपुर मेट्रो की नई डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई थी। आखिरकार 28 फरवरी 2019 को केंद्रीय कैबिनेट ने कानपुर मेट्रो को मंजूरी दे दी और फिर 8 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर मेट्रो का शिलान्यास किया। कानपुर मेट्रो रेल परियोजना का निर्माण कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 15 नवंबर, 2019 को शुरू किया गया था। परियोजना को दो साल से भी कम समय में पूरा किया गया है और आज 9 किलोमीटर लंबे प्राइमरी सेक्शन पर ट्रायल रन शुरू हो जाएगा।
आगरा मेट्रो: 30 जून 2016 को प्रकाशित TOI की रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ मेट्रो रेल निगम लिमिटेड ने आगरा की मेट्रो प्रणालियों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी। आगरा परियोजना केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच 50:50 इक्विटी साझेदारी के साथ संयुक्त उद्यम के रूप में परिकल्पित हैं। हालाँकि केंद्र सरकार ने आगरा मेट्रो रेल विकास परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को खारिज कर दिया। अब आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित मेट्रो रेल नीति 2017 के मानदंडों के अनुसार नई डीपीआर तैयार करनी होगी।
वहीं 6 मार्च 2024 को प्रकाशित दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोलकाता से वर्चुअल माध्यम से आगरा मेट्रो के प्राथमिकता वाले छह किमी लंबे कारिडोर का शुभारंभ किया। प्राथमिकता वाले कारिडोर में छह स्टेशनों में मेट्रो चलेगी। इसमें तीन एलीवेटेड और तीन भूमिगत स्टेशन हैं। प्रत्येक स्टेशन से सटकर पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
आगरा वासियों को मेट्रो रेल सुविधा प्राप्त होने की हार्दिक बधाई!
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 6, 2024
होली के पूर्व इस उपहार के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का हृदय से आभार! pic.twitter.com/nnQpLrb7aZ
नोएडा से ग्रेटर नोएडा मेट्रो: 15 दिसम्बर 2016 को प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नोएडा के सेक्टर 71 से ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-V तक 15 किलोमीटर लंबे मेट्रो लिंक की आधारशिला रखी। शहरी विकास मंत्रालय (MoUD) ने जून 2016 में मेट्रो लिंक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी दी थी, जिसकी अनुमानित लागत ₹ 3,884 करोड़ है। हालांकि, परियोजना के लिए वित्तपोषण पैटर्न को अंतिम रूप देने में अभी तक राज्य सरकार की भूमिका न होने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है।
वहीं 25 जनवरी 2019 को प्रकाशित आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच मेट्रो लाइन को हरी झंडी दिखाई. मेट्रो की इस लाइन को एक्वा लाइन कहा जाता है। यह नोएडा सेक्टर 51 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा के डिपो स्टेशन तक जाएगी। 29.7 किलोमीटर लंबी एक्वा लाइन पर 21 स्टेशन हैं, जिनमें से 15 नोएडा और 6 ग्रेटर नोएडा में हैं।
मेरठ मेट्रो: 12 May 2016 को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ में मेट्रो ट्रेन की ड्राफ्ट डीपीआर का सत्यापन करने के बाद लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन ने संशोधन के साथ अपने सुझाव पेश कर दिए हैं। इस संबंध में सभी विभागों की बैठक में सामने आया कि मेट्रो की राह में जहां धन और जमीन की कमी है तो सेना ने भी आपत्ति दर्ज करा दी है। 12 स्टेशन ऐसे हैं, जहां न तो प्राइवेट और न ही सरकारी जमीन खाली है। पैसा बचाने के चक्कर में टीम ने मेट्रो के दो स्टेशन भी खत्म कर दिए हैं।
इससे पहले 14 फरवरी 2016 को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट में बताया गया कि सीएम अखिलेश यादव ने डीपीआर फाइनल होने के बाद भी बजट में मेरठ को नजरअंदाज कर दिया। प्रदेश सरकार ने यूपी बजट 2016-2017 पेश किया। सीएम ने मेट्रो परियोजना के लिए भी अपने खजाने का मुंह खोला। लखनऊ मेट्रो पर तेजी से काम के लिए 814 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। कानपुर और वाराणसी पर काम आगे बढ़ाने के लिए पचास पचास करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की गई। मेरठ के लिए इस बाबत एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई।
VIDEO | Meerut, Uttar Pradesh: PM Narendra Modi (@narendramodi) undertakes a metro ride to Meerut South station.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 22, 2026
(Source: Third Party)
(Full video available on https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/VCgHxcJtIF
वहीं 22 फरवरी 2026 को प्रकाशित लल्लनटॉप रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सबसे तेज ‘मेरठ मेट्रो’ और ‘नमो भारत ट्रेन’ के बचे कॉरिडोर का उद्घाटन कर दिया। 23 किलोमीटर लंबे मेरठ मेट्रो रूट पर कुल 13 स्टेशन मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैंसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, डौरली, मेरठ नॉर्थ, मोदीपुरम और मोदीपुरम डिपो हैं। यात्री मेरठ साउथ, शताब्दी नगर, बेगमपुल और मोदीपुरम में मेट्रो और नमो भारत के बीच अपनी ट्रेन को बदल सकते हैं।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के द्वारा होली के पूर्व मेरठ को, नमो भारत ट्रेन के साथ मेट्रो का उपहार आज प्रदान किया गया है… pic.twitter.com/0fgXMisaua
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 22, 2026
विकास की नींव या चुनावी शिलान्यास की राजनीति?
उत्तर प्रदेश में मेट्रो परियोजनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच लंबे समय से राजनीतिक श्रेय की लड़ाई चल रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव दावा करते हैं कि उनकी सरकार ने प्रदेश में मेट्रो नेटवर्क की शुरुआत की और लखनऊ, कानपुर, आगरा तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसी परियोजनाओं की नींव रखी। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि इनमें से अधिकांश परियोजनाएं अखिलेश सरकार में केवल कागजों, DPR और शिलान्यास तक सीमित रहीं, जबकि वास्तविक निर्माण, उद्घाटन और विस्तार बाद की सरकार में हुआ। मेट्रो परियोजनाओं की पूरी टाइमलाइन देखने पर तस्वीर इन दोनों दावों के बीच कहीं नजर आती है। अखिलेश सरकार ने उत्तर प्रदेश में मेट्रो परियोजनाओं की नींव रखने में भूमिका निभाई लेकिन यह भी सच है कि उनके कार्यकाल में कई शहरों में मेट्रो स्टेशन, ट्रैक का निर्माण तक नहीं हुआ था, अधिकांश परियोजनाओं का निर्माण, विस्तार और संचालन योगी सरकार के दौरान पूरा हुआ।

